27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच संपन्न हुआ। इस दौरान एक संयुक्त घोषणापत्र को अपनाया गया, जिसमें सदस्य देशों ने बहुपक्षीय सहयोग, वैश्विक शांति, सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को बढ़ावा देना’ (Fostering Parliaments for People-Centric Development) विषय पर 26-27 अक्टूबर को आयोजित इस दो दिवसीय मंच का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया।संयुक्त घोषणापत्र में ब्रिक्स सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इन सिद्धांतों में संप्रभु समानता, आपसी सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना और अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान शामिल है।
इसमें 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का भी समर्थन किया गया, जिसका विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) था।इस घोषणापत्र का मुख्य जोर वैश्विक शासन संस्थानों, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार पर था। ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 के पैराग्राफ 13 का हवाला देते हुए, भाग लेने वाली संसदों ने संयुक्त राष्ट्र (जिसमें सुरक्षा परिषद भी शामिल है) में व्यापक सुधारों का समर्थन किया। इसका उद्देश्य इसे अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, लोकतांत्रिक, प्रभावी और समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं के प्रति उत्तरदायी बनाना है। घोषणापत्र में ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के प्रतिनिधित्व और भागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। अंतरराष्ट्रीय निर्णय-प्रक्रियाएं।इस घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों और प्रकारों की कड़ी निंदा की गई, जिसमें सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के लिए फंडिंग और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराना शामिल है।
इसमें विशेष रूप से 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की गई, जिसमें 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। भाग लेने वाले देशों ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की नीति अपनाने का आह्वान किया, आतंकवाद विरोधी प्रयासों में दोहरे मानदंडों को खारिज किया और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के भीतर ‘अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन’ (Comprehensive Convention on International Terrorism) को जल्द अंतिम रूप देने और अपनाने की भी मांग की।मंच ने समावेशी आर्थिक विकास, सार्वजनिक सेवा वितरण और सतत विकास को बढ़ावा देने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के महत्व को रेखांकित किया। घोषणापत्र में ब्रिक्स (BRICS) देशों के लिए एक ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर रिपॉजिटरी’ (भंडार) स्थापित करने और डिजिटल परिवर्तन के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के प्रस्ताव को स्वीकार किया गया।
साथ ही, डेटा गोपनीयता, डिजिटल संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करते हुए AI संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया गया।जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर, घोषणापत्र में ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन’ (UNFCCC) और ‘पेरिस समझौते’ के प्रति ब्रिक्स देशों की प्रतिबद्धता को दोहराया गया। इसमें ‘समानता’ (equity) और ‘साझी लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और क्षमताओं’ (Common but Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities) के सिद्धांतों पर जोर दिया गया। साथ ही, विकसित देशों से विकासशील देशों को पर्याप्त जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता-निर्माण में सहायता प्रदान करने का आग्रह किया गया। मंच ने ‘संयुक्त राष्ट्र 2030 सतत विकास एजेंडा’ और इसके ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (SDGs) को लागू करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया।घोषणापत्र में मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई गई और स्थायी शांति तथा क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए संयम बरतने, बातचीत करने और राजनयिक प्रयास करने का आह्वान किया गया। इसमें ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (दो-राष्ट्र समाधान) के माध्यम से इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए समर्थन दोहराया गया।
भाग लेने वाले देशों ने अंतर्राष्ट्रीय कानून के विपरीत एकतरफा दबाव डालने वाले कदमों की भी निंदा की, जिसमें गैर-कानूनी आर्थिक प्रतिबंध और ‘सेकेंडरी सैंक्शंस’ (दूसरे देशों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध) शामिल हैं।मंच ने ब्रिक्स साझेदारी को मजबूत करने के लिए संसदीय कूटनीति, विधायी सहयोग और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान (people-to-people exchanges) के महत्व पर भी जोर दिया। इसने शिक्षा, संस्कृति, खेल, युवा मामलों और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्रों में अधिक सहयोग को बढ़ावा देने का समर्थन किया। इस घोषणापत्र में रूस के उस प्रस्ताव पर भी ध्यान दिया गया, जिसमें अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए खेल के क्षेत्र में ब्रिक्स (BRICS) देशों की संसदों का एक ‘वर्किंग ग्रुप’ बनाने पर विचार करने की बात कही गई है।
समापन भाषण देते हुए, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जोर देकर कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान टकराव के बजाय बातचीत, शांति और आपसी सहयोग से ही निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पृष्ठभूमि, परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद, ब्रिक्स देशों की मानव कल्याण, शांति और समृद्धि के प्रति एक समान प्रतिबद्धता है।बिरला ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का स्थायी समाधान युद्ध के बजाय बातचीत से, टकराव के बजाय शांति से और प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग से निकाला जाना चाहिए। उन्होंने एक ऐसे वैश्विक ढांचे की वकालत की, जो राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और सभी देशों के लिए समान विकास के अवसरों पर आधारित हो।लोकतांत्रिक संस्थाओं की बदलती जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए, बिड़ला ने कहा कि संसदें केवल कानून बनाने वाली संस्थाएं ही नहीं हैं, बल्कि वे संवाद, आम सहमति, जवाबदेही और जन विश्वास के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं। उन्होंने विधायिकाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने संसदीय कामकाज और जन भागीदारी को बेहतर बनाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों की संभावनाओं को भी रेखांकित किया, साथ ही यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि इनका उपयोग नैतिक सिद्धांतों, पारदर्शिता और जवाबदेही के अनुरूप हो।बिड़ला ने आगे इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स (BRICS) की सफलता केवल सदस्य देशों के विकास तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कल्याण में भी योगदान देना चाहिए।
उन्होंने इस बात के महत्व को रेखांकित किया कि वैश्विक शासन में ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आकांक्षाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।मंच के समापन पर, बिड़ला ने चीन को बधाई दी, जो 2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि सदस्य देशों के बीच सहयोग और मजबूत होता रहेगा। संयुक्त घोषणापत्र में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की सफलतापूर्वक मेजबानी करने के लिए भारतीय संसद को भी बधाई दी गई। साथ ही, इसमें भाग लेने वाले देशों ने संसदीय सहयोग, वैश्विक शांति और साझा समृद्धि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।https://x.com/ombirlakota/status/2115022544860541178/photo/1