राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए जेंडर-न्यूट्रल चाइल्ड केयर लीव (CCL) देने, अनिवार्य पेड पैटरनिटी लीव शुरू करने और 2030 तक पाँच लाख क्रेच सीटें बनाने की सिफारिश की है। केंद्र सरकार को दी गई इन सिफारिशों का मकसद मैटरनिटी सुरक्षा बढ़ाना, बच्चों की देखभाल में दोनों माता-पिता की भागीदारी को बढ़ावा देना और कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को दूर करना है।
मैटरनिटी और बच्चों की देखभाल से जुड़े कानूनों पर अपनी सिफारिशी रिपोर्ट में, आयोग ने महिलाओं पर केंद्रित मौजूदा CCL व्यवस्था को जेंडर-न्यूट्रल अधिकार में बदलने का प्रस्ताव दिया है, जिसका लाभ माता या पिता दोनों में से कोई भी उठा सके।
रिपोर्ट में मौजूदा 730 दिनों की CCL की सुविधा को काम करने वाले माता-पिता दोनों के बीच बराबर-बराबर (365-365 दिन) बाँटने या एक कॉमन पूल बनाने की सिफारिश की गई है, जहाँ माता-पिता दोनों एक ही संस्था में काम करते हों। दो साल तक की उम्र के बच्चों के लिए, इसमें प्राइमरी और सेकेंडरी देखभाल करने वालों के बीच 60:40 के शेयरिंग मॉडल का प्रस्ताव है।
प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए, NCW ने चरणबद्ध तरीके से लागू करने का मॉडल सुझाया है, जिसकी शुरुआत बड़े उद्योगों से होगी और बाद में इसे मध्यम और छोटे उद्यमों तक बढ़ाया जाएगा। इसने प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा देने के लिए CCL को ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी’ में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है।
आयोग ने बच्चों की देखभाल से जुड़ी नीतियाँ अपनाने वाले नियोक्ताओं के लिए टैक्स में छूट और आर्थिक मदद की भी सिफारिश की है, साथ ही सरकारों, नियोक्ताओं और कर्मचारियों को शामिल करते हुए मिलकर फंडिंग करने वाले मॉडल का सुझाव भी दिया है। बच्चों की देखभाल के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए, NCW ने केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से 2030 तक पांच लाख क्रेच (बच्चों की देखभाल केंद्र) सीटें बनाने के लिए ‘नेशनल चाइल्डकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन’ का प्रस्ताव दिया है। इसने ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020’ की धारा 67 में सुधार करने की सिफारिश की है ताकि क्रेच से जुड़ी व्यवस्थाओं को ज़्यादा लचीला, आसानी से उपलब्ध और असरदार बनाया जा सके। साथ ही, इसने महिलाओं के काम-काज में लगातार भागीदारी के लिए बच्चों की देखभाल की सुविधाओं को ज़रूरी माना है।
आयोग ने यह भी कहा है कि मैटरनिटी (मातृत्व) और बच्चों की देखभाल से जुड़े लाभ इनफॉर्मल, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स तक पहुँचने चाहिए। NCW के अनुसार, 90 प्रतिशत से ज़्यादा महिला वर्कर असरदार कवरेज के दायरे से बाहर हैं।
इस कमी को दूर करने के लिए, इसने ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020’ की धारा 109 को लागू करने की सिफारिश की है। इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से एक खास ‘मैटरनिटी एंड चाइल्डकेयर फंड’ बनाया जाना चाहिए।
नियोक्ताओं से। इसने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) को सभी के लिए उपलब्ध और कानूनी रूप से लागू करने योग्य अधिकार बनाने का प्रस्ताव भी दिया है।
काम की जगह पर होने वाले भेदभाव को दूर करने के लिए, NCW ने ऐसे उपाय सुझाए हैं जिनसे भर्ती के दौरान महिलाओं के खिलाफ भेदभाव का आधार बनने से मातृत्व और बच्चों की देखभाल से जुड़े लाभों को रोका जा सके। रिपोर्ट में इस सोच को बदलने की भी बात कही गई है कि CCL (चाइल्ड केयर लीव) लेने वाली महिलाएं अपने काम के प्रति कम समर्पित होती हैं।
आयोग ने बच्चों की देखभाल को राष्ट्र-निर्माण की जिम्मेदारी और एक साझा सामाजिक कार्य के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया है। इसकी सिफारिशों में महिलाओं के प्रमोशन, वेतन और पेंशन पर करियर में आने वाले ब्रेक के असर को दूर करने की कोशिश भी की गई है, और इस बात पर जोर दिया गया है कि मातृत्व करियर के लिए सजा नहीं बननी चाहिए।
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