22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और आसियान के बीच सहयोग को गहरा करने और व्यापक रणनीतिक साझेदारी का विस्तार करने के उद्देश्य से दस प्रमुख पहलों का अनावरण किया।ये पहल सतत विकास को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ाने, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं।
दस पहलों की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
• व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आसियान-भारत कार्य योजना (2026-2030) के कार्यान्वयन हेतु समर्थन।
• सतत पर्यटन पर आसियान-भारत संयुक्त नेताओं के वक्तव्य को अपनाना।
• 2026 को “आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष” घोषित करना।
• द्वितीय आसियान-भारत रक्षा मंत्रियों की बैठक और द्वितीय आसियान-भारत समुद्री अभ्यास आयोजित करने का प्रस्ताव।
• भारत क्षेत्रीय संकटों में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में अपनी भूमिका जारी रखेगा, आपदा तैयारी और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) में सहयोग को मज़बूत करेगा।
• आसियान पावर ग्रिड पहल का समर्थन करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा में 400 पेशेवरों को प्रशिक्षण।
• आसियान के सबसे नए सदस्य, तिमोर-लेस्ते तक त्वरित प्रभाव परियोजनाओं (QIP) का विस्तार।
• नालंदा विश्वविद्यालय में दक्षिण पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव।
• शिक्षा, ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, वित्तीय प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक संरक्षण में निरंतर सहयोग, जिसमें बुनियादी ढाँचे, अर्धचालक, उभरती हुई प्रौद्योगिकियाँ, दुर्लभ मृदा और महत्वपूर्ण खनिजों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
• गुजरात के लोथल में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन समुद्री विरासत महोत्सव का आयोजन, साथ ही समुद्री सुरक्षा सहयोग पर एक सम्मेलन का आयोजन।https://x.com/MEAIndia/status/1982441725722296411/photo/3