बेंगलुरु, कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने पुलिस महानिदेशक एम. ए. सलीम से अपील की कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित रूप से अयोग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की मांग करते हुए फॉर्म-7 आवेदन दाखिल करने वाले भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज न किए जाएं। पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपने के बाद अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पुलिस पर भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बना रही है।
उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 आवेदन दाखिल करना कानूनी अधिकार है। अशोक ने पत्रकारों से कहा फॉर्म-7 दाखिल करना अपराध नहीं है। किसी मतदाता की सच्चाई और वैधता तय करने का अधिकार पुलिस थाने का नहीं बल्कि निर्वाचन आयोग का है। उनकी यह टिप्पणी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म-7 के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आई है।
मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने बृहस्पतिवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनब्बुकुमार से मुलाकात कर मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 आवेदनों के कथित गलत इस्तेमाल की शिकायत की थी। फॉर्म-7 एक आवेदन फॉर्म है जिसके जरिए मौजूदा मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने या हटाने के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज की जाती है।
शिवकुमार और मंत्री मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की सीढ़ियों पर बैठ गए थे और कहा था कि कथित गलत इस्तेमाल को रोकने की उनकी मांग पर अनुकूल फैसला होने तक वे वहां से नहीं जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा फॉर्म-7 आवेदनों के जरिए अल्पसंख्यकों दलितों और अनुसूचित जनजातियों को निशाना बना रही है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि कुछ लोग दूसरे लोगों की ओर से आवेदन दाखिल कर उनके नाम हटवा रहे हैं।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common