बंगाल: दिनहाटा और शीतलकुची में नजदीक आ रही मतदान की तारीख, स्थानीय निवासियों में बढ़ रही बेचैनी

कूचबिहार, उत्तर बंगाल में कूचबिहार जिले के दिनहाटा और शीतलकुची विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान का समय जैसे-जैसे करीब आ रहा है स्थानीय निवासियों के बीच एक अजीब बेचैनी बढ़ने लगी है। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा के गढ़ माने जाने वाले इन इलाकों में मतदाता आशंकित हैं क्योंकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के बीच छोटे-छोटे झगड़े कब बम और गोलियों के साथ बड़े सड़क संघर्ष में बदल जाएं इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

दिनहाटा सीट से मौजूदा विधायक उत्तर बंगाल के विकास मंत्री और टीएमसी नेता उदयन गुहा ने अब तक अपने चुनाव प्रचार में पार्टी के विकास एजेंडे पर ध्यान केंद्रित किया है और विपक्ष के खिलाफ भड़काऊ बयान देने से बचते रहे हैं जबकि वह इसके लिए जाने जाते हैं। स्थानीय पत्रकार प्रभिर कुंडू के अनुसार शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि गुहा जानते हैं कि इस बार उनका मुकाबला भाजपा के नए उम्मीदवार अजय रॉय से है न कि पुराने प्रतिद्वंद्वी निशित प्रमाणिक से।

इस वजह से उन्हें अपनी जीत की संभावना बेहतर लग रही है। फॉरवर्ड ब्लॉक के वरिष्ठ नेता और छह बार विधायक रहे कमल गुहा के पुत्र उदयन गुहा 2011 से लगातार तीन बार विधायक हैं। पहली बार वह वाम दल के टिकट पर विधायक बने थे जबकि गत दो बार से वह टीएमसी के विधायक हैं। साल 2021 में गुहा केवल 57 वोट से प्रमणिक से हार गए थे लेकिन उपचुनाव में उन्होंने 1.6 लाख से अधिक मतों के अंतर और 84 प्रतिशत वोट हासिल करके वापसी की। प्रमणिक ने केंद्रीय मंत्री बनने के बाद यह सीट छोड़ दी थी जिसके बाद उपचुनाव हुआ था। साल 2021 के चुनाव के बाद हुई हिंसा के दौरान दिनहाटा में गुहा पर हमला हुआ था जिसमें उनका हाथ टूट गया था। उन्होंने इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया था।

साल 2023 के पंचायत चुनावों में दो गुटों के बीच झड़प में गोलीबारी हुई जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हुए। मार्च 2025 में कथित टीएमसी समर्थकों ने दिनहाटा में अदालत परिसर से निकल रहे कूचबिहार दक्षिण से भाजपा के विधायक निखिल रंजन डे की कार पर हमला किया। तीन दिन बाद उसी क्षेत्र में टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच फिर झड़प हुई जिसमें कई लोग घायल हुए। अगस्त 2025 में दिनहाटा के सालमारा इलाके में भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों में तोड़फोड़ की गई और कई लोग घायल हुए। हमले के दौरान आठ महीने की एक गर्भवती महिला को भी कथित तौर पर लात मारी गई जिसकी वजह से वह घायल हो गई।

इस तनावपूर्ण माहौल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर नया असंतोष उभर रहा है। इस प्रक्रिया के तहत लगभग 26 000 नाम या तो मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं या जांच के अधीन हैं। प्रभावित लोगों में 51 पूर्व बांग्लादेशी बस्ती के निवासी भी शामिल हैं जिन्हें 2015 में भारत और पड़ोसी देश के बीच हुए ऐतिहासिक बस्ती आदान-प्रदान के बाद भारतीय नागरिक बनाया गया था।

मध्य मशालडांगा के निवासी जैनुल आबिदीन ने कहा “निर्वाचन आयोग के आश्वासन के बावजूद हममें से लगभग 80 प्रतिशत यानी करीब 8 000 लोग अब भी जांच के अधीन हैं। यह विडंबना है कि हमारी नागरिकता पर फिर सवाल उठ रहा है।” पवातुर्कुठी के सद्दाम हुसैन ने कहा “हमने निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन से कई बार अपील की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

अगर नाम नहीं जोड़े गए तो हम अदालत जाने की योजना बना रहे हैं।” बस्ती निवासियों के अधिकारों के लिए आंदोलन का नेतृत्व करने वाले भाजपा नेता दीप्तिमान सेनगुप्ता ने कहा कि वह पार्टी से पहले प्रभावित लोगों के साथ खड़े होंगे। साल 2021 के चुनाव में दिनहाटा जैसा ही तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल पास के शीतलकुची में भी दिखा था जहां मतदान के दिन हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई थी। शीतलकुची के जोरपाटकी गांव में मतदान के दौरान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों की गोलीबारी में चार युवकों की मौत हो गई थी।

बलों का कहना था कि उन्होंने आत्मरक्षा में गोली चलाई। उसी दिन एक अन्य घटना में एक भाजपा समर्थक और पहली बार वोट देने वाले युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। साल 2021 में भाजपा के बरेन चंद्र बर्मन ने टीएमसी के पार्थ प्रतिम राय को लगभग 18 000 वोट से हरा दिया था। इस बार टीएमसी ने हरिहर दास को उम्मीदवार बनाया है जिन्हें भाजपा के राज्यसभा सदस्य अनंत महाराज का करीबी माना जाता है जिससे स्थानीय राजनीति में नया समीकरण बन सकता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में अनंत महाराज को राजबंशी समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान के लिए बंगाल का सर्वोच्च सम्मान “बंग विभूषण” प्रदान किया था।

भाजपा ने भी अपने मौजूदा विधायक की जगह नयी उम्मीदवार सवित्री बर्मन को मैदान में उतारा है। लेकिन शीतलकुची के आमतली माध्यमिक शिक्षा केंद्र परिसर में बना शहीद स्तंभ आज भी 2021 की गोलीबारी की याद दिलाता है। निर्वाचन आयोग के सामने इस बार भी हिंसा-मुक्त चुनाव कराने की बड़ी चुनौती है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

%d bloggers like this: