बदायूं में नीलकंठ महादेव-जामा मस्जिद मामले में अब आठ अप्रैल को होगी सुनवाई

बदायूं (उप्र), बदायूं जिले की एक अदालत में चल रहे नीलकंठ महादेव बनाम शम्सी जामा मस्जिद मामले की सुनवाई अब आठ अप्रैल को होगी। एक अधिवक्ता ने यह जानकारी दी। अधिवक्ताओं के अनुसार अपर दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) सुमन तिवारी की अदालत ने आज दोपहर बाद दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं को मामले की सुनवाई के लिए अदालत में बुलाया।

जामा मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता असरार अहमद एवं अनवर आलम ने यह दलील दी कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार निचली (जिला स्तरीय अदालत) अदालत को इस प्रकार के वाद सुनने का कोई अधिकार नहीं है।

सुमन तिवारी ने इस पर उच्चतम न्यायालय का आदेश मांगा तो जामा मस्जिद पक्ष के अधिवक्ताओं ने अगली तारीख लगाने का अनुरोध किया जिसका नीलकंठ महादेव मंदिर के अधिवक्ताओं– विवेक रेंडर वेद प्रकाश साहू और अर्पित श्रीवास्तव आदि ने विरोध किया।

अदालत ने जामा मस्जिद पक्ष को उच्चतम न्यायालय के आदेश की प्रति उपलब्ध कराने और मामले में बहस करने के लिए आठ अप्रैल की तारीख नियत की है। सुनवाई की पिछली तारीख 15 जनवरी 2026 थी जिसमें अधिवक्ताओं की हड़ताल के चलते कोई सुनवाई नहीं हो सकी थी और अदालत द्वारा 23 मार्च की तारीख दी गई थी।

हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष और नीलकंठ महादेव मंदिर पक्ष के वादी मुकेश पटेल ने बताया कि दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) सुमन तिवारी के अवकाश से वापस लौट आने के पश्चात फाइल पुनः उनकी अदालत में वापस गई है।

उन्‍होंने कहा कि आज नीलकंठ महादेव पक्ष के अधिवक्ताओं ने काफी देर तक सुनवाई लिए न्यायाधीश से अनुरोध किया जबकि जामा मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता बहस करने के पक्ष में नजर नहीं आए। अदालत ने उच्चतम न्यायालय के आदेश की प्रति की मांग की जिसको जामा मस्जिद पक्ष के अधिवक्ताओं ने अगली तारीख पर देने का अनुरोध किया। दोनों पक्षों की बात सुनने के पश्चात न्यायाधीश तिवारी ने इस मामले में आठ अप्रैल की तारीख तय की है।

यह विवाद 2022 में तब शुरू हुआ जब मुकेश पटेल ने दावा किया कि जामा मस्जिद शम्सी स्थल पर नीलकंठ महादेव मंदिर मौजूद है और उन्होंने ढांचे में पूजा करने की अनुमति मांगी।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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