सियोल, भारत के एकल खिलाड़ी सुमित नागल और दक्षिणेश्वर सुरेश को डेविस कप क्वालीफायर के दूसरे दौर में दक्षिण कोरिया के खिलाड़ियों के अलावा धीमे कोर्ट और जल्दी नरम होने वाली वाली गेंदों की चुनौती से जूझना होगा। इस दो दिवसीय मुकाबले (19 और 20 सितंबर) से पहले कोर्ट की सतह को नए सिरे से तैयार किया गया है। ऐसे में एकल वर्ग में भारत के दोनों खिलाड़ियों के लिए परिस्थितियां मुश्किल होंगी।
नागल अधिक उछाल वाली कोर्ट को तरजीह देते हैं वहीं सुरेश अपनी दमदार सर्विस के लिए जाने जाते हैं। भारतीय कप्तान रोहित राजपाल ने कहा कि दक्षिण कोरिया ने ऐसी परिस्थितियां तैयार की हैं जो भारतीय एकल खिलाड़ियों के मजबूत पक्ष को कम कर सकती हैं।राजपाल ने अभ्यास सत्र के बाद ‘पीटीआई’ से कहा ‘‘उन्होंने काफी सोच-समझकर और समझदारी से कोर्ट की सतह को दोबारा तैयार किया है। उन्होंने वास्तव में हमारे दोनों खिलाड़ियों की ताकत को ध्यान में रखते हुए परिस्थितियां तैयार की हैं।’’उन्होंने कहा ‘‘कोर्ट धीमा है लेकिन साथ ही गेंद में उछाल भी नहीं है। नागल को गेंद का ज्यादा उछलना पसंद है क्योंकि वह काफी ‘टॉपस्पिन’ के साथ खेलता है। लेकिन यहां गेंद उछल ही नहीं रही है।’’
बेसलाइन से अपने खेल पर काफी निर्भर रहने वाले सुमित नागल को ऊंचे उछाल वाली गेंद पसंद है जबकि दक्षिणेश्वर सुरेश की तेज और दमदार सर्विस धीमे कोर्ट पर अपेक्षाकृत कम प्रभावी हो सकती है।राजपाल ने कहा कि दक्षिण कोरियाई टीम ने कोर्ट की गति इसलिए भी धीमी की है क्योंकि सुरेश को भी धीमे कोर्ट पसंद नहीं है।उन्होंने कहा ‘‘उसकी सर्विस बेहद तेज है। इसलिए उन्होंने कोर्ट को धीमा करके उसकी इस ताकत का भी तोड़ निकालने की कोशिश की है।’’भारतीय कप्तान के मुताबिक गेंदों की स्थिति भी चुनौती को और बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा ‘‘हर तीसरे गेम के बाद गेंद की स्थिति बदल जाती है। गेंद का वजन थोड़ा बढ़ा लगता है और वह थोड़ी फूलने जैसी हो जाती है इससे उसकी गति काफी कम हो जाती है।’’ भारत को हालांकि परिस्थितियों के अनुरूप ढलने के लिए पर्याप्त समय मिला है क्योंकि टीम मुकाबले से काफी पहले सियोल पहुंच गई थी।राजपाल ने कहा ‘‘इस बार उन्हें घरेलू कोर्ट का फायदा मिलेगा। इसलिए हम परिस्थितियों के मुताबिक रणनीति बनाने की कोशिश करेंगे। अच्छी बात यह है कि हम यहां पहले ही पहुंच गए थे और हमें स्थिति का अंदाजा हो गया है। अब हमें यह देखना है कि किस तरह रणनीति तैयार कर इन परिस्थितियों को अपनी ताकत में बदला जाए।’’
राजपाल ने कहा कि डेविस कप में मेजबान टीम के लिए अनजान परिस्थितियों से निपटना प्रतियोगिता का हिस्सा है। अक्सर मेजबान देश अपने फायदे के मुताबिक कोर्ट की सतह चुनते हैं। उन्होंने कहा ‘‘हम भी ऐसा करते हैं। भारत आने वाली कई टीमों के खिलाफ हम घास के कोर्ट पर खेलते रहे हैं जबकि उनमें से कई खिलाड़ियों ने अपने जीवन में कभी घास के कोर्ट पर नहीं खेला होगा। इसलिए यह डेविस कप का हिस्सा है।’’भारतीय टीम को इस मुकाबले में परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालते हुए लचीला रुख अपनाना होगा।
टीम को अपनी रणनीति में बदलाव के लिए भी तैयार रहना होगा। राजपाल ने कहा ‘‘ हमारी मुख्य रणनीति कारगर नहीं होती तो दूसरी रणनीति को अमल में लाना होगा। अगर दूसरी रणनीति भी बेअसर रही तो तीसरी रणनीति का सहारा लेना होगा। हमें वैकल्पिक योजना को हमेशा तैयार रखना होगा। ’’ मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद राजपाल का मानना है कि भारत और दक्षिण कोरिया की टीमें लगभग बराबरी की हैं और मुकाबले का नतीजा इस बात से तय हो सकता है कि दबाव और महत्वपूर्ण अंकों के समय कौन-सी टीम बेहतर प्रदर्शन करती है। उन्होंने कहा ‘‘मुझे लगता है कि दोनों टीमें काफी बराबरी की हैं। दक्षिण कोरिया यहां तक पहुंचने वाली मजबूत टीम है। उसने अर्जेंटीना जैसी मजबूत टीम को हराया है।’’ राजपाल ने कहा ‘‘ दोनों टीमों का फर्क मुकाबले के दिन दिखेगा। उस दिन जो टीम परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटेगी उसका दबदबा रहेगा।’
’युवा खिलाड़ी मानस धामने को भी डेविस कप में पदार्पण का मौका मिल सकता है लेकिन राजपाल ने कहा कि यह फैसला पहले दिन के मुकाबलों के नतीजों और परिस्थितियों को देखकर लिया जाएगा। राजपाल ने कहा कि वह युवा खिलाड़ियों को डेविस कप जैसे बड़े मंच के दबाव से रूबरू कराना चाहते हैं। उन्होंने धामने के बारे में कहा “अगर मुझे मौका मिलता है तो मैं निश्चित रूप से उसे खिलाना चाहूंगा। हमारी कोशिश है कि युवा खिलाड़ियों को भी टीम में शामिल किया जाए ताकि वे इस तरह के दबाव को समझ सकें और उससे निपटने के लिए तैयार हों।” राजपाल ने कहा कि भारत का लक्ष्य अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदा पीढ़ी के आगे बढ़ने के बाद टीम में विकल्पों की कमी से बचने के लिए मजबूत युवा प्रतिभाओं को तैयार करना है। उन्होंने कहा “हम जब भी खेलते हैं हमारी टीम में हमेशा कुछ युवा खिलाड़ी होते हैं। इससे हमारी अगली पीढ़ी तैयार होती रहती है और टीम के लिए प्रतिभाओं की पाइपलाइन मजबूत बनी रहती है।’’क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common