नयी दिल्ली, ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व ड्रैग-फ्लिकर रूपिंदर पाल सिंह ने भारतीय जूनियर हॉकी टीम से आगामी एफआईएच जूनियर विश्व कप में पोडियम (शीर्ष तीन स्थान) पर जगह बनाने उम्मीद जताते हुए कहा कि टूर्नामेंट में सफलता युवा खिलाड़ियों की खेल से जुड़ी योजनाओं पर निर्भर करेगी।
भारत ने इससे पहले 2001 और 2016 में जूनियर विश्व कप जीता है। जूनियर विश्व के आगामी सत्र का आयोजन 28 नवंबर से 10 दिसंबर तक चेन्नई और मदुरै में होगा।
जूनियर टीम के कोच और अपने दोस्त पीआर श्रीजेश के अनुरोध पर युवा ड्रैग फ्लिकरों को प्रशिक्षण देने वाले रूपिंदर ने कहा ‘‘श्रीजेश इस समय टीम के साथ अच्छा काम कर रहे हैं। हम जानते हैं कि खिलाड़ी युवा हैं उनमें गति और प्रतिभा है लेकिन महत्वपूर्ण ‘गेम सेंस ( मौजूदा परिस्थितियों की समझ)’ और ‘गेम मैनेजमेंट (खेल योजना)’ की समझ होना काफी अहम है। उन्हें मिनट-दर-मिनट खेल को प्रबंधित करना सीखने की जरूरत है। जितना ज्यादा वे खेलेंगे उतना ही उन्हें अनुभव मिलेगा। उनके पास सब कुछ है बस उन्हें गेम मैनेजमेंट पर काम करने की जरूरत है।’’
रुपिंदर ने ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा ‘‘इस टीम में क्षमता है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे उस दिन कैसा प्रदर्शन करते हैं और अपने गेम को कैसे प्रबंधित करते हैं। श्रीजेश अच्छा काम कर रहे हैं इसलिए मुझे उम्मीद है कि उनका अनुभव टीम को फायदा पहुंचाएगा।’’
रुपिंदर ने इस महीने की शुरुआत में बेंगलुरु में जूनियर टीम के साथ 10 दिनों का ड्रैग-फ्लिक शिविर आयोजित किया था।
उन्होंने कहा ‘‘मुझे हॉकी से जुड़ी कोई भी चीज करना पसंद है। मैं कुछ दिनों के लिए बेंगलुरु में जूनियर टीम के ड्रैग-फ्लिकरों के साथ काम करने गया था। मैं कोई पूर्ण कालिक कोच नहीं हूं। मैं सिर्फ अपने अनुभव को साझा करके मदद करने की कोशिश कर रहा हूं। मैं अपनी ड्रैग-फ्लिक विशेषज्ञता को आगे बढ़ा रहा हूं।’’
तोक्यो ओलंपिक (2021 में आयोजित) में कांस्य पदक जीतने वाली टीम के सदस्य रहे रुपिंदर राष्ट्रीय टीम से संन्यास लेने के बाद फिलहाल हॉकी इंडिया लीग में खेल रहे हैं। पिछले साल वह खिताबी जीत हासिल करने वाली टीम श्रची राढ़ बंगाल टाइगर्स के कप्तान थे। ‘मिनी ऑक्शन’ में उन्हें एसजी पाइपर्स ने 12 लाख रुपये में खरीदा है।
रक्षा पंक्ति के इस लंबे कद के खिलाड़ी ने स्वीकार किया कि संन्यास के बाद उनके लिए शरीर को फिट रखना कठिन होता जा रहा है।
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