नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) सभा के 8वें सत्र में, सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने आईएसए सदस्यता में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाते हुए डिपॉजिटरी रिपोर्ट प्रस्तुत की – 2018 में 47 सदस्यों से बढ़कर 2025 में 125 सदस्य हो गए।मंत्रालय आईएसए सदस्यों द्वारा प्रस्तुत फ्रेमवर्क समझौते और अनुसमर्थन एवं परिग्रहण के साधन का डिपॉजिटरी है।
दलेला ने कहा कि भारत सौर ऊर्जा का दोहन करने, ऊर्जा पहुँच और ऊर्जा सुरक्षा को आगे बढ़ाने, साझेदारी को बढ़ावा देने और सौर ऊर्जा से संचालित एक स्थायी भविष्य के निर्माण के लिए आईएसए सदस्यों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।आईएसए भारत और फ्रांस के बीच एक सहयोगी पहल है जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा समाधानों को लागू करके जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को एकजुट करना है। इसकी संकल्पना 2015 में पेरिस में आयोजित COP21 के दौरान की गई थी। इसके फ्रेमवर्क समझौते में 2020 में हुए संशोधन के बाद, अब सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश इस गठबंधन में शामिल होने के पात्र हैं। वर्तमान में, 100 से अधिक देश इस पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, और 90 से अधिक देशों ने पूर्ण सदस्य बनने के लिए अनुमोदन कर दिया है।
इसका लक्ष्य 2030 तक सौर ऊर्जा में 1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश प्राप्त करना है, साथ ही प्रौद्योगिकी और वित्तपोषण लागत को कम करना है। https://x.com/MEAIndia/status/1983209569640919220/photo/2