महात्मा गांधी की 1947 की यात्रा से जुड़े पीएमसीएच भवन पर मंडरा रहा है गिराए जाने का खतरा

पटना, भारत को स्वतंत्रता मिलने से तीन महीने पहले महात्मा गांधी अपने भाई की पोती मनु की सर्जरी के लिए ऐतिहासिक पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) पहुंचे थे, लेकिन पुनर्विकास परियोजना के दौरान बापू से जुड़े इस ऐतिहासिक भवन पर गिराए जाने का खतरा मंडरा रहा है।

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर रविवार को पीएमसीएच एलुमनी एसोसिएशन और विभिन्न गांधीवादियों ने बिहार सरकार से 100 साल से ज्यादा पुराने बांकीपुर सदर अस्पताल भवन को नहीं गिराने की अपील की।

गौरतलब है कि इसी भवन में करीब 75 साल पहले मनु की सर्जरी हुई थी।

गांधी शांति मिशन के अध्यक्ष एन. राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘यह पटना और बापू की अमूल्य विरासत है। हम भारत की स्वतंत्रता के 75वें साल का उत्सव मना रहे हैं। पीएमसीएच के साथ गांधी जी का संबंध जुड़े हुए भी 75 साल हो गए हैं। लेकिन, इस बात का उत्सव मनाने की जगह इसे गिराने के लिए चिन्हित किया गया है।’’

उन्होंने राज्य सरकार से ऐतिहासिक इमारतों को नहीं गिराने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि ‘‘इन्हें गिराना महात्मा गांधी की विरासत को ध्वस्त करने जैसा होगा’’, खास तौर से तब जब गांधी के दिल में बिहार के लिए खास जगह थी और उसे वह ‘कर्मभूमि’ मानते थे।

गौरतलब है कि 1925 में प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज के नाम से स्थापित किये गये पीएमसीएच के ऐतिहासिक भवन को तीन चरणों वाले पुनर्विकास परियोजना के तहत गिराने के लिए चिन्हित किया गया है।

अधिकारियों ने पहले बताया था कि परिसर में बहुमंजिला आधुनिक इमारत बनाने के लिए पहले चरण में इमारतों को गिराने का काम शुरू हो चुका है। परिसर में गंगा नदी के किनारे स्थित मेडिकल अधीक्षक के पुराने बंगले, जेल वार्ड, नर्स छात्रावास और कुछ अन्य भवनों को गिराया जा चुका है।

महात्मा गांधी 10 अप्रैल, 1917 को अपनी चम्पारण यात्रा के दौरान पहली बार पटना आए थे।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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