यूक्रेन में मचाई गई तबाही के लिए रूस को क्षतिपूर्ति करनी होगी: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक

लंदन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने यहां बुधवार को ‘यूक्रेन रिकवरी समिट’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि इसके यूरोपीय पड़ोसी देश में मचाई गई तबाही के लिए रूस को अवश्य ही क्षतिपूर्ति करनी होगी। उन्होंने यूक्रेन को ब्रिटिश सरकार की ओर से तीन अरब अमेरिकी डॉलर की ऋण गारंटी की भी घोषणा की। सुनक ने यू्क्रेन की समझ-बूझ की सराहना की और देश के ऊर्जा ग्रिड को नष्ट करने की कोशिश करने को लेकर रूस पर प्रहार किया। लंदन में यूक्रेन के साथ संयुक्त रूप से ब्रिटेन इस दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। रूस के साथ जारी संघर्ष में यूक्रेन की मदद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के उद्देश्य से इसका आयोजन किया जा रहा है।

             सुनक ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि रूस को उस तबाही की क्षतिपूर्ति करनी होगी जो उसने की है। इसलिए हम रूसी संपत्ति के उपयोग के लिए कानूनी रास्ता तलाशने के वास्ते सहयोगियों के साथ काम कर रहे हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘ब्रिटिश सरकार अपने प्रयास जारी रखेगी और मुझे गर्व है कि आज हम यू्क्रेन की अर्थव्यवस्था को सहयोग करने के लिए कुछ वर्षों की एक प्रतिबद्धता की घोषणा कर रहे हैं। तीन वर्षों में हम तीन अरब अमेरिकी डॉलर की ऋण गारंटी मुहैया कराएंगे।’’विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बंगा ने इस नाजुक समय में यूक्रेन के लोगों को यह सहायता दिये जाने के ब्रिटिश सरकार के कदम का स्वागत किया।

             विश्व बैंक के भारतीय मूल के प्रमुख ने कहा, ‘‘ब्रिटेन के सहयोग को विश्व के 38 देशों के 400 से अधिक कंपनियों का समर्थन प्राप्त है। कुल 1,600 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के वार्षिक राजस्व के साथ यूक्रेन के पुनर्निर्माण में सहयोग करने का संकल्प लिया गया है।  सुनक ने यूक्रेन के लिए एक नये ‘ब्रिटेन-यूक्रेन टेक ब्रिज’ की भी घोषणा की, जिसका उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देना है। इसके बाद, उन्होंने सम्मेलन में डिजिटल माध्यम से यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का स्वागत किया, जिन्होंने एक बार फिर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की पूर्ण सदस्यता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यूक्रेन पहले से ही यूरोपीय रक्षा व्यवस्था का एक अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘यूक्रेन का पुनर्निर्माण कर हम विश्व का निर्माण कर रहे हैं और यह आने वाली पीढ़ियों तक मौजूद रहेगा। क्या यह शांतिपूर्ण होगा? क्या यह स्थिर होगा? क्या यह लोकतांत्रिक होगा? यह हममें से प्रत्येक पर निर्भर करता है।’’

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

%d bloggers like this: