लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 18 मार्च को दिल्ली विधानसभा को संबोधित किया। ओम बिरला ने दिल्ली विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम का उद्घाटन किया और विधायकों को संबोधित किया।
बिरला ने कहा कि भारत की आधुनिक संसद की नींव वर्ष 1912 से 1926 के बीच दिल्ली विधानसभा के इस ऐतिहासिक भवन में रखी गई थी। यह विधान भवन जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने का सशक्त माध्यम है। इसलिए इसे और बेहतर बनाया जाना चाहिए।
ओम बिरला ने कहा कि प्रत्येक विधायक की जिम्मेदारी है कि वह विधायी कार्यों में अपना शत-प्रतिशत योगदान दे, सदन में अधिक समय तक बैठे और सदन की कार्यवाही में भाग ले। दिल्ली देश की राजधानी है, जो एक लघु भारत है। इस राज्य के विधानसभा सदन में होने वाली चर्चाएं और संवाद तथा लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने के प्रयास पूरे देश में संदेश देते हैं। हमारा प्रयास होना चाहिए कि दिल्ली विधानसभा चर्चाओं के साथ-साथ तकनीक के उपयोग का मॉडल बने और विधायकों के कार्य की दक्षता बढ़े।
विधायकों को विधानसभा की पुरानी बहसों और कार्यवाही का अध्ययन करना चाहिए। उन्हें सभी नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए, विधायी उपकरणों के उपयोग का कौशल हासिल करना चाहिए, ताकि वे सदस्य के रूप में अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से आह्वान किया कि वे सदन में तार्किक तरीके से अपनी बात रखें, मुद्दों पर चर्चा करें और सुनिश्चित करें कि उनकी भाषा और व्यवहार हमेशा संसदीय हो। बिरला ने सांसदों से आग्रह किया कि वे हमेशा जनता से जुड़े रहें, उनके मुद्दों को समझें और अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए तकनीक का उपयोग करें। अगर प्रतिस्पर्धा है तो अपने-अपने क्षेत्रों में नवाचार करने और अधिक से अधिक लोगों की समस्याओं का समाधान करने के बारे में होनी चाहिए।
https://twitter.com/ombirlakota/status/1901886523169255590/photo/1