वाम मोर्चा ने बांग्लाभाषियों को ‘निशाना’ बनाने के खिलाफ कोलकाता में निकाला विरोध मार्च

कोलकाता, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत वाम मोर्चा ने कुछ राज्यों में पश्चिम बंगाल के बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों के कथित उत्पीड़न के खिलाफ जुलूस निकाला और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में प्रवासी श्रमिकों को निशाना बनाया जा रहा है और कुछ को बांग्ला बोलने के कारण भारतीय होने के बावजूद जेल में डाल दिया गया या बांग्लादेश निर्वासित कर दिया गया।

उन्होंने मांग की कि ममता बनर्जी सरकार यह सुनिश्चित करे कि बांग्लाभाषियों के अधिकारों की रक्षा हो। माकपा की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव और पार्टी पोलित ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद सलीम ने अन्य वाम मोर्चा नेताओं के साथ जुलूस में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा ‘‘प्रवासी श्रमिकों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए।’’

वाम मोर्चा द्वारा आयोजित यह रैली मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड से शुरू होकर करीब दो किलोमीटर दूर रामलीला पार्क में समाप्त हुई। वाम नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार को यह मुद्दा केंद्र के साथ-साथ उन राज्यों के समक्ष भी उठाना चाहिए जहां ऐसी कथित घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने तथा अन्य स्थानों पर राज्य के प्रवासी श्रमिकों पर कथित अत्याचार के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की भी मांग की।

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 21 जुलाई को पार्टी की ओर से आयोजित वार्षिक शहीद दिवस रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि ‘‘बंगालियों बांग्ला भाषा और भाषाई आतंकवाद’’ पर कथित हमलों के विरोध में अगले रविवार से बंगाल में एक आंदोलन शुरू होगा। सलीम ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करते हुए दावा किया कि यह निर्वाचन आयोग के क्षेत्राधिकार में नहीं है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडियाफोटो क्रेडिट : Wikimedia common

%d bloggers like this: