वास्तविक छात्रों की सुरक्षा होनी चाहिए, दंगाइयों की नहीं: न्यायालय के निर्देशों के बाद भाजपा ने कहा

नयी दिल्ली, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि कथित नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर प्रदर्शनों से संबंधित याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश ने वास्तविक छात्र प्रदर्शनकारियों और हिंसा में शामिल लोगों के बीच स्पष्ट अंतर करते हुए रेखांकित किया है कि ‘‘असहमति स्वीकार्य है दंगा नहीं।’’ भाजपा ने यह टिप्पणी तब की जब उच्चतम न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे दर्ज प्राथमिकियों की जांच जारी रखें लेकिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करें तथा जिन प्रदर्शनकारियों की उम्र 18 वर्ष से कम है और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है उन्हें रिहा किया जाए। अदालत ने नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर हाल में हुए देशव्यापी आंदोलन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पुलिस की कथित ज्यादतियों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा ‘‘प्रथम दृष्टया आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जरूरत है। इस जांच में घायल हुए 200 से अधिक पुलिसकर्मियों के परिवारों की चिंताओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।’’ भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को ‘‘परिपक्व और संवेदनशील’’ तरीके से देखा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा ‘‘उच्चतम न्यायालय ने बहुत परिपक्वता और संवेदनशीलता के साथ इस मामले पर विचार किया है। इसका सभी को स्वागत करना चाहिए।’’

पूनावाला ने कहा ‘‘छात्र और आगजनी या दंगा करने वाले लोग अलग-अलग हैं। छात्रों की सुरक्षा होनी चाहिए आगजनी करने वालों की नहीं। अदालत ने यह कहा है। असहमति ठीक है दंगा नहीं। छात्र ठीक हैं आगजनी करने वाले नहीं। विरोध-प्रदर्शन ठीक हैं लेकिन उकसावा नहीं।’’भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि सरकार पहले से ही यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि वास्तविक प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई मामला आगे नहीं बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा ‘‘लेकिन आगजनी करने वालों के खिलाफ मामले जारी रहेंगे। जिन लोगों पर हमला करने छेड़छाड़ करने या अन्य आपराधिक कृत्यों के स्थापित आरोप हैं उन्हें कोई सार्वभौमिक ‘पूर्ण सुरक्षा कवच’ नहीं दिया जा सकता।’’

प्रधान न्यायाधीश की टिप्पणियों का हवाला देते हुए पूनावाला ने कहा कि अदालत ने यह भी माना है कि ‘‘प्रथम दृष्टया आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जरूरत है जिसमें घायल हुए 200-250 पुलिसकर्मियों के परिवारों की चिंताओं का भी समाधान होना चाहिए।’’

न्यायमूर्ति सूर्यकांत न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उन सभी राज्यों को निर्देश दिया जहां प्रदर्शन हुए थे कि वे सीसीटीवी फुटेज ड्रोन रिकॉर्डिंग बॉडी कैमरा फुटेज वायरलेस संचार रिकॉर्ड पीसीआर लॉग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखें। उच्चतम न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि प्रदर्शनकारियों से संबंधित एकत्र किए गए किसी भी डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखा जाए लेकिन उसे सार्वजनिक न किया जाए।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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