नयी दिल्ली, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) के मसौदे में स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई को रुचिकर एवं रचनात्मक बनाने के लिए ‘‘ कक्षा, जमीनी अनुभव और प्रयोगशाला’’ के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही वैज्ञानिक प्रयोग, खोज, जांच परख, परियोजना केंद्रित पहल, शिक्षाप्रद अनुप्रयोग एवं प्रदर्शन मानक की ‘छह सूत्री’ व्यवस्था को अपनाने का कहा गया है।
मसौदे में कहा गया है कि विज्ञान की पढ़ाई केवल विषय के सिद्धांत और तथ्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करना ही नहीं है, बल्कि सिद्धांत एवं वास्तविक जीवन के बीच संबंध, विज्ञान की प्रक्रिया क्षमता का ज्ञान प्राप्त करना और इन जानकारियों का उपयोग दुनिया को समझने में करना है।
नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुसार तैयार किए जा रहे एनसीएफ में यह भी कहा गया है कि छात्र अपने आसपास की दुनिया को जानना और यह समझना चाहते हैं कि ऐसा क्यों और कैसे हो रहा है। जांच पड़ताल एवं अन्वेषण की इस प्रक्रिया में वे अपनी परिकल्पना की जांच करने के लिए परीक्षण एवं त्रुटि की पद्धति (ट्रायल एंड एरर) का उपयोग करते हैं और एक निष्कर्ष तक पहुंचते हैं।
इसमें कहा गया है कि विज्ञान को सिर्फ जानकारी एवं तथ्यों का संग्रह मानने की प्रवृति है। इस तरह की मान्यता में ऐसा मान लिया जाता है कि ऐसे कुछ सिद्धांत, तथ्य और जानकारियां हैं जिन्हें छात्रों को अवश्य जानना चाहिए। हालांकि, वास्तविकता यह है कि आज विज्ञान के ज्ञान का आधार काफी व्यापक है और यह अभूतपूर्व रफ्तार से बढ़ रहा है।
मसौदे में कहा गया है, ‘‘ इससे स्पष्ट होता है कि हम विज्ञान के कितने भी तथ्य जान लें, यह कभी पर्याप्त नहीं होगा।’’
ऐसे में दुनिया के बारे में किसी आयु वर्ग के लिए पर्याप्त जानकारी देना, विज्ञान की पढ़ाई के लिए उपयुक्त आधार एवं प्लेटफार्म प्रदान करना तथा विज्ञान से जुड़ी क्षमता एवं मूल्यों के विकास के लिए उत्तम सामग्री उपलब्ध करना महत्वपूर्ण है।
एनसीएफ के मसौदे के अनुसार, ‘‘ पठन पाठन के मानक में इन सिद्धांतों का बुद्धिमतापूर्ण समावेश हो ताकि छात्रों पर से सामग्री के बोझ को कम किया जा सके।’’
विज्ञान के पाठ्यक्रम में कुछ बुनियादी सवालों के जवाब होने चाहिए, मसलन..छात्र अपने आसपास क्या देखता है ? छात्रों के किस प्रकार के सामान्य आकलन होते हैं ? विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के कौन कौन से आयाम उनके दैनिक जीवन का हिस्सा हैं ? उनकी तात्कालिक चिंताएं क्या हैं? वे पर्यावरण के विविध आयामों का किस प्रकार से आकलन करते हैं ? छात्र किस प्रकार से सबसे अच्छे तरीके से सीख सकता है तथा विज्ञान की पढ़ाई किस प्रकार उसे दैनिक जीवन में मदद कर सकती है ?
मसौदे में स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई को रूचिकर एवं रचनात्मक बनाने के लिए ‘‘ कक्षा, जमीनी अनुभव और प्रयोगशाला’’ के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया गया है। इसमें वैज्ञानिक प्रयोग, खोज, जांच परख, परियोजना केंद्रित पहल, शिक्षाप्रद अनुप्रयोग एवं प्रदर्शन मानक की ‘छह सूत्री’ व्यवस्था अपनाने का सुझाव दिया गया है।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, अंतिम चरण के मसौदे पर विभिन्न हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगी गई है। एनसीएफ को आखिरी बार 2005 में संशोधित किया गया था।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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