नयी दिल्ली, संसद में बजट सत्र के दौरान दोनों सदनों में गतिरोध और हंगामे के कारण काफी कम विधायी कामकाज होने का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ते हुए सरकार ने कहा कि इसके लिए उसका अड़ियल रवैया जिम्मेदार है। संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि सरकार ने संसद की कार्यवाही चलाने के लिए काफी प्रयास किए और कार्य मंत्रणा समिति (बीएससी) सहित विपक्ष के साथ 10 बैठकें की लेकिन उनके (विपक्षी दलों) के अड़ियल रवैये के कारण गतिरोध नहीं दूर हो सका।
संसद के बजट सत्र की शुरूआत 31 जनवरी को हुई और पहला चरण 13 फरवरी तक चला। सत्र का दूसरा चरण 13 मार्च से शुरू हुआ। बजट सत्र का दूसरा हिस्सा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के अलग अलग मुद्दों को लेकर अपने रुख पर अड़े रहने के कारण हंगामे एवं नारेबाजी की भेंट चढ़ गया। विपक्ष अडाणी समूह से जुड़े मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित किए जाने की मांग कर था। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने लोकतंत्र को लेकर लंदन में राहुल गांधी द्वारा की गई एक टिप्पणी पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष से माफी मांगने पर जोर दिया।
मेघवाल ने कहा कि बजट सत्र के पहले चरण में अच्छा कामकाज हुआ लेकिन उसके बाद ऐसा मुद्दा आया जिसके कारण दूसरे चरण की बैठक में गतिरोध की स्थिति उत्पन्न हो गई।
उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिये बिना कहा कि विदेश में जाकर एक नेता ने भारत में लोकतंत्र के खतरे में पड़ने, व्यवस्था के खतरे में पड़ने और लोकसभा अध्यक्ष पर माइक बंद करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा, ‘‘ विपक्ष की एक मांग (जेपीसी गठित करने की) थी और हमारी भी एक मांग थी।
संसदीय कार्य राज्य मंत्री ने कहा कि इसके बाद ऐसी स्थिति भी आई जब ऐसा लगा कि अध्यक्ष अगर तय करें तो दोनों पक्ष अपने अपने रुख को छोड़कर सदन में चर्चा शुरू कर देंगे। लेकिन कुछ कारणों से ऐसा नहीं हो पाया।
उन्होंने दावा किया,‘‘ हम (सत्ता पक्ष) अपने रूख से पीछे हटने तैयार थे लेकिन विपक्ष के अपने रूख पर अड़े रहने के कारण कार्यवाही नहीं चल सकी। राहुल गांधी को लोकसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहराने के संदर्भ में मेघवाल ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम वर्तमान सरकार ने नहीं बनाया है और इस विषय पर (अयोग्यता पर) फैसला उच्चतम न्यायालय ने 2013 में दिया था।
उन्होंने कहा कि लेकिन शायद कांग्रेस चाहती है कि राहुल गांधी के लिये अलग नियम-कानून हों। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे कहते हैं कि बोलने की आजादी नहीं है लेकिन कोलार की सभा में राहुल गांधी ने ही बोला था। गौरतलब है कि सूरत की एक अदालत ने आपराधिक मानहानि मामले में 23 मार्च को राहुल गांधी को दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई दी। उसके अगले ही दिन उन्हें लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहरा दिया गया।
मेघवाल ने कहा कि व्यवधान के कारण लोकसभा में 34 प्रतिशत और राज्यसभा में 24.4 प्रतिशत कामकाज हुआ।
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