दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA), म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ दिल्ली (MCD), दिल्ली सरकार और दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (DSIIDC) को यमुना नदी की सफ़ाई से जुड़ी कार्यवाही के तहत समयपुर बादली की सीमा तय करने और नया रीडेवलपमेंट प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस प्रतिभा सिंह और मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने ‘कोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया और अन्य’ मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।
हाई कोर्ट ने राजधानी में इंडस्ट्रियल प्लॉट के रीडेवलपमेंट के लिए ज़रूरी नियमों में ढील की मांग करने वाले अनुरोध का जवाब न देने पर DDA को फटकार भी लगाई। कोर्ट ने कहा कि इस देरी के कारण रीडेवलपमेंट की प्रक्रिया पूरी तरह से ठप हो गई है। कोर्ट ने री-डेवलपमेंट (पुनर्विकास) और यमुना की सफाई के बीच संबंध पर ज़ोर देते हुए कहा कि इन इलाकों का री-डेवलपमेंट ज़रूरी है ताकि यह पक्का किया जा सके कि बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज का पानी नदी में न जाए और सभी अधिकारियों को इसके महत्व को समझना चाहिए।