सिल्वर लाइन परियोजना का केवल आरंभिक कार्य किया गया, केरल सरकार ने अदालत को बताया

कोच्चि, सिल्वर लाइन परियोजना को लेकर विपक्षी दलों की कड़ी आपत्तियों के बीच केरल में वाम नेतृत्व वाली सरकार ने उच्च न्यायालय में परियोजना का बचाव करते हुए कहा है कि केवल तैयारी और प्रारंभिक कार्य किए गए हैं।

विपक्षी दल कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने परियोजना को लेकर आपत्ति जताई है।

उच्च न्यायालय में दाखिल एक हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा है कि उसने सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) अध्ययन करने और रिपोर्ट का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेषज्ञ समूह के गठन को लेकर 18 अगस्त 2021 को एक सरकारी आदेश (जीओ) जारी किया था।

राज्य सरकार ने कहा है कि अगस्त 2021 के आदेश में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि रेलवे बोर्ड से परियोजना के लिए अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

हालांकि, उसी हलफनामे में राज्य ने यह भी कहा है कि 31 दिसंबर 2021 के आदेश के अनुसार सेमी हाई स्पीड रेलवे लाइन ‘सिल्वर लाइन परियोजना’ के लिए विभिन्न गांवों की 1,221 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण के संबंध में संशोधित आदेश जारी किए गए हैं।

राज्य सरकार ने यह हलफनामा एम टी थॉमस की याचिका के जवाब में दाखिल किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सिल्वर लाइन परियोजना के लिए केंद्र या अन्य उपयुक्त प्राधिकारों की मंजूरी के बिना भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है।

अधिवक्ता के मोहनकनन के माध्यम से दायर याचिका में राज्य सरकार और केरल रेल विकास निगम लिमिटेड (के-रेल) के खिलाफ अवमानना कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में इस आरोप का खंडन किया है कि उसने अदालत को दिए गए आश्वासन का उल्लंघन किया।

केरल सरकार की महत्वाकांक्षी सिल्वर लाइन परियोजना पूरी होने से तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक यात्रा का समय लगभग चार घंटे तक कम होने की उम्मीद है। विपक्षी दल कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ का आरोप है कि यह ‘‘अवैज्ञानिक और अव्यवहारिक’’ परियोजना है और इससे राज्य पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक 540 किलोमीटर खंड को संयुक्त उपक्रम के-रेल विकसित करेगा। ‘के-रेल’ राज्य में रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केरल सरकार और रेल मंत्रालय का संयुक्त उपक्रम है।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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