चंडीगढ़, हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने बच्चों की सुरक्षा और मजबूत करने के लिए राज्य के सभी बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआईएस) में पर्याप्त और प्रभावी सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित करने की सिफारिश की है। आयोग ने कहा है कि सभी आवश्यक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगे होने के साथ-साथ चालू हालत में भी होने चाहिए। साथ ही फुटेज को कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्टोरेज और बैकअप व्यवस्था होनी चाहिए। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पीठ ने एक शिकायत पर हाल में यह आदेश पारित किया।
मामला करनाल के मधुबन स्थित ‘प्लेस ऑफ सेफ्टी’ में बच्चों के साथ मारपीट के आरोपों से जुड़ा था। पुलिस ने मामले की जांच की और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य सामग्री के आधार पर वहां के कर्मचारियों द्वारा बच्चों से मारपीट किए जाने के आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। पुलिस जांच में भी किसी संज्ञेय अपराध के होने का पता नहीं चला। हालांकि सुनवाई के दौरान आयोग ने बाल देखभाल संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दे पर विचार किया। आयोग के संज्ञान में आया कि ‘प्लेस ऑफ सेफ्टी-आई’ मधुबन में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग के लिए केवल एक महीने की स्टोरेज/बैकअप सुविधा थी। इसे अपर्याप्त मानते हुए आयोग ने फुटेज को कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आयोग ने कहा कि बच्चों के रहने वाले क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी से हिंसा मारपीट धमकी दुर्व्यवहार या किसी अन्य अप्रिय घटना की स्थिति में समय पर हस्तक्षेप किया जा सकेगा। किसी घटना या शिकायत की स्थिति में सीसीटीवी फुटेज निष्पक्ष इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में भी काम करेगा।
न्यायमूर्ति बत्रा की अध्यक्षता वाले आयोग ने अपनी सिफारिशों का दायरा बढ़ाते हुए कहा कि यह व्यवस्था केवल मधुबन के ‘प्लेस ऑफ सेफ्टी’ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि हरियाणा के सभी बाल देखभाल संस्थानों में समान रूप से लागू की जानी चाहिए।
सभी जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग राज्य-स्तरीय समेकित अनुपालन रिपोर्ट तैयार कर आयोग को सौंपेगा। अरोड़ा ने बताया कि मामले की अगली सुनवाई के लिए चार फरवरी 2027 की तारीख तय की गई है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common