वायु प्रदूषण को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाते हुए, ‘कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट इन नेशनल कैपिटल रीजन एंड एडजोइनिंग एरियाज’ (CAQM) ने 5 से 20 नवंबर, 2026 तक पूरे नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में धूल उड़ाने वाली तोड़फोड़ और बाहरी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। कमीशन ने सरकारी…दिल्ली और पांच NCR जिलों में निजी कार्यालय अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति के साथ काम करेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करेंगे।’
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021′ की धारा 12 के तहत जारी ये निर्देश, प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से दिए गए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि ऐतिहासिक रूप से इसी समय के आसपास दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के गंभीर दौर देखने को मिलते रहे हैं।इस आदेश के तहत, पूरे NCR में धूल पैदा करने वाले विध्वंस (demolition) कार्यों और बाहरी निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू होंगे। इसमें राजमार्ग, सड़कें, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली ट्रांसमिशन लाइनें, पाइपलाइन और दूरसंचार कार्यों जैसी सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी शामिल हैं।
हालांकि, रेलवे, मेट्रो सेवाओं, हवाई अड्डों, अंतर-राज्य बस टर्मिनलों, अस्पतालों, जलापूर्ति और स्वच्छता, राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़ी गतिविधियों, तथा राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को इन प्रतिबंधों से छूट दी गई है।आयोग ने दिल्ली और गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद तथा गौतम बुद्ध नगर जिलों में स्थित सरकारी और निजी कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति के साथ काम करें।
बाकी कर्मचारी घर से काम करेंगे। जिन औद्योगिक इकाइयों और आवश्यक सेवाओं में ऐसी व्यवस्था लागू करना संभव नहीं है, उन्हें इससे छूट दी गई है।CAQM ने बताया कि नवंबर 2018 से 2025 तक के ऐतिहासिक दैनिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर बार-बार बढ़ता है, खासकर नवंबर की शुरुआत से मध्य नवंबर के बीच। कुछ समय के दौरान तो AQI ‘गंभीर’ (Severe) और ‘अत्यधिक गंभीर’ (Severe+) श्रेणियों तक पहुंच गया था।
आयोग ने कहा कि इस दौरान स्थानीय प्रदूषण स्रोतों, मौसमी कृषि अवशेषों को जलाने, बायोमास जलाने और अन्य कारणों से होने वाले उत्सर्जन के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। इसके अलावा, प्रतिकूल मौसम संबंधी स्थितियां – जैसे हवा की कम गति, वायुमंडल की निचली परत का सीमित होना और प्रदूषकों का हवा में ठीक से न मिल पाना – प्रदूषण को फैलने से रोकती हैं, जिससे यह एक जगह जमा हो जाता है।CAQM ने कहा कि प्रदूषण के इस बार-बार होने वाले मौसमी पैटर्न को देखते हुए, प्रदूषण के चरम स्तर पर पहुंचने से पहले ही बचाव के उपाय करना जरूरी है।
इन उपायों का उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों पर ही उत्सर्जन को कम करना और वायुमंडल में प्रदूषकों के जमाव को न्यूनतम करना है। आयोग ने कहा कि ये उपाय एहतियाती हैं और एक निश्चित समय-सीमा तथा भौगोलिक क्षेत्र तक ही सीमित हैं। आयोग ने यह भी कहा कि ज़रूरी सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं को छूट इसलिए दी गई है, ताकि ज़रूरी कामकाज में कोई रुकावट न आए।ये निर्देश NCR राज्यों की सरकारों और दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों तथा एजेंसियों को जारी किए गए हैं, जिन्हें 5 नवंबर से 20 नवंबर, 2026 के बीच लागू किया जाना है।https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Janpath,_a_road_in_New_Delhi_05.jpg