शिलांग, मेघालय उच्च न्यायालय ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से हलफनामा दाखिल करने और राज्य में पहूंचने में लगने वाले समय में कटौती करने के उद्देश्य से लंबी दूरी की उड़ानों और बड़े विमानों को जगह देने के लिए शिलांग विमानतल के विस्तार की संभावना तलाश करने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने सोमवार को हुई सुनवाई के लिए पारित आदेश में कहा, “भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और नागर विमानन महानिदेशालय को हलफनामा दाखिल कर बताना है कि उमरोई हवाई अड्डे का विस्तार कर उसमें बोईंग जैसे विमान और लंबी दूरी की उड़ान को जगह देने की संभावना है या नहीं।”
पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार हवाई अड्डे से दूर पहाड़ों को काटने के लिए ढेर सारा पैसा खर्च कर रही है लेकिन लंबी दूरी की उड़ानों को संभालने और बड़े विमानों को जगह देने के वास्ते विमानतल के विस्तार के बारे में कोई रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।
आदेश में कहा गया, “राज्य की ओर से कहा गया कि दोनों तरफ के पर्वत को काटकर रनवे के आगे समतल भूमि को विस्तार देने के लिए ढेर सारा पैसा खर्च किया गया। यह संभव है कि बोईंग और बड़े विमानों को संभालने के लिए सुरक्षित रनवे के निर्माण से पहले और पहाड़ों को काटा जाए।” उच्च न्यायालय ने कहा कि मेघालय में पर्यटन को विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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