अदालत ने ‘सेंटर फॉर पॉलिसी’ को कर्मियों के वेतन के लिए कुछ कोष का इस्तेमाल करने की अनुमति दी

नयी दिल्ली, दिल्ली उच्च न्यायालय ने थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च’ (सीपीआर) को सोमवार को राहत देते हुए उसे अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए सावधि जमा कोष के एक हिस्से का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी। सीपीआर का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (फेरा) लाइसेंस नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में निलंबित है।

             उच्च न्यायालय ने सीपीआर के उस आवेदन को स्वीकार कर लिया जिसमें उसके कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए सावधि जमा में पड़े कोष के 25 फीसदी का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी गई थी, क्योंकि कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नहीं दिया गया है।

             न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने अंतरिम आदेश देते हुए कहा, “आवेदन स्वीकार किया जाता है। रिट याचिका को सुनवाई के लिए 11 जनवरी 2024 को सूचीबद्ध किया जाए।”

             संगठन ने कानून का उल्लंघन करने के आरोप में फेरा लाइसेंस निलंबित करने को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है और यह आवेदन उसी याचिका का हिस्सा है।

             सीपीआर का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने पहले दलील दी थी कि फेरा के नियमों के तहत जब पंजीकरण प्रमाण पत्र को निलंबित किया जाता है तो 25 फीसदी ‘गैर उपयोगी राशि’ को कुछ उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और इस याचिका में यह राशि सावधि जमा में है।

             केंद्र ने इस आवेदन का विरोध किया था। केंद्र ने इस साल 27 फरवरी को संगठन का फेरा लाइसेंस निलंबित कर दिया था। मार्च में सीपीआर ने अधिकारियों को एक आवेदन देकर वेतन भुगतान के लिए अपने कोष का 25 प्रतिशत जारी करने की मांग की थी।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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