अक्रा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और अफ्रीका को दीर्घकालिक साझेदार बताते हुए कहा कि आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन रणनीतिक स्वायत्तता और ‘ग्लोबल साउथ’ में सहयोग जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए। जयशंकर ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा ‘‘अफ्रीका हमारे दिल में बसता है और ऐसी साझेदारी करेंगे जो केवल आज के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए होगी।”
उन्होंने यह बात घाना के विदेश सेवा संस्थान में एक कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद कही। जयशंकर मंगलवार को घाना पहुंचे। यह उनकी तीन अफ्रीकी देशों की यात्रा का पहला पड़ाव है और इसके बाद कोटे डी आइवर और इथियोपिया जाएंगे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यहां घाना के अपने समकक्ष सैम ओकुदजेटो अबलाकवा से मुलाकात की तथा इस दौरान दोनों देशों ने बहुपक्षीय सहयोग और अफ्रीकी संघ तथा ईसीओडब्ल्यूएएस (पश्चिम अफ्रीकी राष्ट्रों का आर्थिक समुदाय) के साथ दिल्ली के बढ़ते जुड़ाव पर चर्चा की। उन्होंने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से भी मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों में आई गति पर बातचीत की।
जयशंकर ने कहा कि उन्होंने घाना के अपने समकक्ष अबलाकवा के साथ व्यापक बातचीत की। मंगलवार को हुई बैठक के बाद उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया ‘‘‘ग्लोबल साउथ’ के साझेदार के तौर पर भारत और घाना दोनों की विकास से जुड़ी आकांक्षाएं और ऐतिहासिक एकजुटता एक जैसी है।’’ दोनों मंत्रियों ने व्यापार निवेश विकास दवा क्षमता निर्माण रक्षा टेक्नोलॉजी और लोगों के बीच आपसी संबंधों के क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा ‘‘हमने अपने बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने और अफ्रीकी संघ तथा ईसीओडब्ल्यूएएस के साथ भारत के जुड़ाव को और मज़बूत करने पर भी बात की।’’
घाना ईसीओडब्ल्यूएएस का संस्थापक सदस्य है यह 15 सदस्यों वाला एक क्षेत्रीय समूह है जो पूरे पश्चिम अफ्रीका में आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक एकीकरण के लिए समर्पित है। अबलाकवा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया ‘‘घाना और भारत अब अहम रणनीतिक साझेदार हैं पिछले साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राजकीय यात्रा के दौरान हमारे द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया था।’’ दोनों देशों ने अकादमिक वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण में सहयोग के लिए ‘भारतीय प्राणी सर्वेक्षण’ और घाना विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान किया।
दोनों मंत्रियों की मौजूदगी में कृषि अनुसंधान और शिक्षा में सहयोग के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नयी दिल्ली और ‘सीएसआईआर-क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट घाना’ के बीच भी एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। इससे पहले जयशंकर ने राष्ट्रपति महामा से मुलाकात की और भारत-घाना संबंधों में आई मज़बूती पर चर्चा की। जयशंकर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा ‘‘आज दोपहर में घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से मुलाकात करना सम्मान की बात है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं।’’
उन्होंने कहा ‘‘हमने पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक यात्रा के बाद भारत-घाना साझेदारी में आयी मजबूती और सकारात्मकता पर चर्चा की। घाना के विकास के लिए राष्ट्रपति महामा के दृष्टिकोण के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में हमारी व्यापक साझेदारी को और गहरा करने के उनके सकारात्मक रुख की सराहना करता हूं।’’ जयशंकर ने कहा कि विदेश नीति का दृष्टिकोण रणनीतिक स्वायत्तता से प्रेरित होना चाहिए। उन्होंने कहा ‘‘हमारा मानना है कि साझेदारियां हमारे विकल्पों का विस्तार करने वाली होनी चाहिए उन्हें सीमित करने वाली नहीं।’’क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common