अमेरिका के प्रस्तावित शुल्क से भारतीय जेनेरिक दवा निर्यात पर असर संभव: जीटीआरआई

नयी दिल्ली,  अमेरिका द्वारा जेनेरिक दवाओं पर प्रस्तावित ऊंचे शुल्क भारत के सबसे बड़े औषधि निर्यात बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि  इसका असर सभी उत्पादों पर एक समान नहीं पड़ेगा। आर्थिक शोध संस्था जीटीआरआई ने यह आकलन पेश किया।

           ये ऐसी सस्ती दवाएं होती हैं जिनमें ब्रांडेड दवाओं जैसा ही सक्रिय घटक  मात्रा और प्रभाव होता है लेकिन इन्हें पेटेंट समाप्त होने के बाद आमतौर पर कम कीमत पर बेचा जाता है।

           ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (जीटीआरआई) ने एक रिपोर्ट में कहा कि भारतीय जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में सात से दस गुना सस्ती होती हैं। ऐसे में 100 प्रतिशत शुल्क लगने के बाद भी कई उत्पाद सस्ते बने रह सकते हैं। अतिरिक्त लागत का बोझ अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं  बीमा कंपनियों और मरीजों पर डाला जा सकता है।

           जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा  ‘‘अधिक दबाव उच्च मूल्य वाली जेनेरिक फॉर्मूलेशन और ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं पर पड़ सकता है। इन श्रेणियों में अमेरिका के भीतर उत्पादन व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य हो सकता है।’’

           उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को अमेरिका पर अपनी निर्भरता घटाकर यूरोप  लातिनी अमेरिका  अफ्रीका और एशिया में निर्यात बढ़ाना चाहिए।

           अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि एक अगस्त से दो वर्षों तक जेनेरिक दवाओं पर शून्य शुल्क रहेगा। इसके बाद एक वर्ष के लिए शुल्क 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य दवा उत्पादन को अमेरिका में स्थानांतरित करना है।

           इससे पहले अप्रैल महीने में अमेरिकी प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा प्रावधानों के तहत कुछ ब्रांडेड दवाओं और प्रमुख औषधीय कच्चे माल पर 100 प्रतिशत तक शुल्क की घोषणा की थी। उस समय जेनेरिक दवाओं को इससे बाहर रखा गया था  लेकिन नई घोषणा के बाद लगभग सभी प्रमुख दवा श्रेणियां इस नीति के दायरे में आ गई हैं।

           अमेरिका ने 2025 में 213 अरब डॉलर के औषधि उत्पाद आयात किए  जिनमें 94.1 अरब डॉलर की तैयार दवाएं शामिल थीं। जेनेरिक दवाओं का अलग से सटीक आकलन उपलब्ध नहीं है क्योंकि उन्हें एचएस कोड 3004 के तहत वर्गीकृत किया जाता है।

           भारत ने पिछले साल 25.8 अरब डॉलर के औषधि निर्यात किए  जिनमें से 9.7 अरब डॉलर यानी 37.7 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को गया। इस तरह अमेरिका  भारत का सबसे बड़ा औषधि निर्यात बाजार है। भारतीय कंपनियां अमेरिका में वितरित जेनेरिक नुस्खों के करीब 47 प्रतिशत की आपूर्ति करती हैं जबकि मूल्य के हिसाब से हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है।

           भारतीय दवा कंपनियों सन फार्मा  जायडस लाइफसाइंसेज  ल्यूपिन  अरबिंदो फार्मा  सिप्ला और डॉ रेड्डीज की अमेरिका में विनिर्माण इकाइयां हैं।

           अमेरिका के अलावा भारत के प्रमुख औषधि निर्यात बाजारों में यूरोपीय संघ  ब्रिटेन  दक्षिण अफ्रीका  नाइजीरिया  ब्राजील  कनाडा  ऑस्ट्रेलिया  रूस  फिलीपींस और केन्या शामिल हैं।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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