अमेरिकी शुल्क चुनौती के बीच सक्रिय वार्ता से समुद्री खाद्य उत्पादों के लिए खुला यूरोपीय बाजार: गोयल

मुंबई, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कहा कि भारत ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यात के लिए उनका बाजार खुलवाया है। उन्होंने कहा कि इससे देश को अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी शुल्कों से उत्पन्न चुनौतियों से उबरने में मदद मिली है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने बाधाओं का अनुमान लगाया और भारतीय निर्यातकों के लिए वैकल्पिक बाजार सुरक्षित करने के लिए तेजी से कदम उठाए।

गोयल ने कहा हमारी सरकार 24 घंटे काम करती है। अक्सर समस्या आने से पहले ही हम योजना बनाना और कार्रवाई शुरू कर देते हैं। मंत्री ने कहा कि भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने के अमेरिकी फैसले ने निर्यात को बड़ा झटका दिया था और मछुआरों के बीच भारी चिंता पैदा कर दी थी।

उन्होंने बताया जब अमेरिका ने भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया तो हमारे निर्यात को बड़ा नुकसान हुआ और मछुआरे बहुत परेशान थे। केंद्र ने यूरोपीय संघ के साथ संपर्क कर और उन नियामक बाधाओं को दूर करके इसका जवाब दिया जिन्होंने पहले भारतीय खेप को प्रतिबंधित कर दिया था।

उन्होंने कहा हमने कड़ा रुख अपनाया और गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र का इस्तेमाल किया। आज 125 से अधिक भारतीय मत्स्य प्रतिष्ठान पंजीकृत हो चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि इससे भारत को एक बड़े और स्थिर बाजार तक फिर से पहुंच बनाने में मदद मिली है। मंत्री ने कहा कि इस रणनीतिक कदम के सकारात्मक परिणाम मिले हैं और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद पिछले साल समुद्री खाद्य निर्यात में लगभग 12-14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोपीय संघ के बाजार को खोलना महत्वपूर्ण था क्योंकि वहां आयात की भारी मांग है और वैश्विक व्यापार में इसका बड़ा महत्व है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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