असम की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है सरकार : हिमंत विश्व शर्मा

गुवाहाटी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। शर्मा ने राज्य के उन कलाकारों को बधाई दी जिन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

उन्होंने कहा कि सत्रिया लोक परंपराएं रंगमंच संगीत और सांस्कृतिक जड़ें असम के लोगों की पहचान हैं। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा ‘‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित असम के कलाकारों को हार्दिक बधाई।’’

उन्होंने कहा ‘‘जैसे-जैसे हम असम के विकास की यात्रा को गति दे रहे हैं वैसे-वैसे हम अपनी समृद्ध विरासत सत्रिया लोक परंपराओं रंगमंच और संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भी समान रूप से प्रतिबद्ध हैं क्योंकि हमारी सांस्कृतिक जड़ें ही हमारी पहचान निर्धारित करती हैं।’’ वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार बुधवार को घोषित किए गए। वर्ष 2024 के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वालों में सत्रिया नृत्य के लिए प्रेमा ओजा बरबायन और कथक नृत्य के लिए बिपुल चंद्र दास शामिल हैं।

वर्ष 2025 के लिए यह पुरस्कार अभिनय श्रेणी के लिए चेतना दास सत्रिया नृत्य के लिए मल्लिका कंदली और सत्रिया संगीत के लिए भास्कर ज्योति ओजा को प्रदान किया जाएगा। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार-2024 के विजेताओं में सत्रिया नृत्य के लिए मीनाक्षी दास लोक संगीत के लिए दिलीप हीरा और रंगमंच निर्देशन के लिए विद्युत कुमार नाथ शामिल हैं। वहीं वर्ष 2025 के लिए सत्रिया नृत्य की श्रेणी में निरंजन सैकिया बरबायन खोल वादन के लिए देबजीत सैकिया और टकारी गीत (लोक संगीत) के लिए हिरक ज्योति शर्मा को सम्मानित किया जाएगा।

सत्रिया नृत्य भारत के आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों में से एक है। यह नृत्य 15वीं-16वीं शताब्दी में असम के महान वैष्णव संत और समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव द्वारा नव-वैष्णव धर्म के प्रचार के रूप में विकसित किया गया था।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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