आतंकवाद को पनाह नहीं देने के लिए वैश्विक समुदाय को एकजुट होना चाहिए : प्रधानमंत्री मोदी

 पोर्ट ऑफ स्पेन,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद को मानवता का दुश्मन करार देते हुए कहा कि वैश्विक समुदाय को इसे पनाह या कोई भी जगह नहीं देने के लिए एकजुट होना चाहिए। त्रिनिदाद एवं टोबैगो की संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों में वृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के लिए एआई(कृत्रिम बु्द्धिमत्ता) उपकरण विकसित कर रहा है और इस मामले में कैरेबियाई राष्ट्र को प्राथमिकता दी जाएगी।

             प्रधानमंत्री ने कहा कि नयी चुनौतियां हैं और पुरानी संस्थाएं शांति व प्रगति लाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।        मोदी ने कहा  ‘‘समय आ गया है कि हम साथ मिलकर काम करें  ताकि ‘ग्लोबल साउथ’ को सही मंच पर उसका उचित स्थान मिल सके।’’

             प्रधानमंत्री ने कहा  ‘‘आतंकवाद मानवता का दुश्मन है। इसी रेड हाउस (त्रिनिदाद एवं टोबैगो की संसद) ने खुद आतंकवाद के घाव और निर्दोष लोगों के खून को बहते देखा है।’’

             उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ खड़े होने के लिए कैरेबियाई देश की जनता और सरकार को धन्यवाद दिया।  मोदी ने कहा  ‘‘मैं हमारी साझेदारी को एक बड़े वैश्विक ढांचे में भी देखता हूं। दुनिया में तेज और अभूतपूर्व गति से परिवर्तन हो रहा है। राजनीति और सत्ता की प्रकृति में मौलिक बदलाव हो रहे हैं। मुक्त व्यापार दबाव का सामना कर रहा है। वैश्विक स्तर पर मतभेद  विवाद और असमानताएं बढ़ रही हैं।’’

             उन्होंने कहा कि दुनिया जलवायु परिवर्तन  खाद्य  स्वास्थ्य एवं ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों का सामना कर रही है  और आतंकवाद एक गंभीर खतरा बना हुआ है।

             उन्होंने वैश्विक संस्थाओं में लंबे समय से लंबित सुधारों पर जोर देते हुए कहा  ‘‘ग्लोबल साउथ उभर रहा है। इसमें शामिल देश एक नयी और अधिक निष्पक्ष विश्व व्यवस्था देखना चाहते हैं।’’

              ग्लोबल साउथ  से तात्पर्य उन देशों से है  जो प्रौद्योगिकी और सामाजिक विकास के मामले में कम विकसित माने जाते हैं। ये देश मुख्यतः दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित हैं। इसमें अफ्रीका  एशिया और लैटिन अमेरिका के देश शामिल हैं।

             मोदी ने कहा  ‘‘जब मैंने (त्रिनिदाद एवं टोबैगो की संसद के) अध्यक्ष की कुर्सी पर  भारत के लोगों की ओर से त्रिनिदाद और टोबैगो के लोगों के लिए  लिखा देखा  तो मुझे यह गहरा भावनात्मक नाता महसूस हुआ। यह कुर्सी महज एक फर्नीचर नहीं है  बल्कि दोनों देशों के बीच मित्रता का एक शक्तिशाली प्रतीक है।

             भारत ने 1968 में त्रिनिदाद एवं टोबैगो की संसद के अध्यक्ष की कुर्सी उपहार में दी थी। इस अलंकृत कुर्सी पर लिखा हुआ है –  भारत के लोगों की ओर से त्रिनिदाद एवं टोबैगो के लोगों के लिए।’’ यह प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की पहली त्रिनिदाद एवं टोबैगो यात्रा है। वर्ष 1999 के बाद से पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री त्रिनिदाद एवं टोबैगो द्विपक्षीय यात्रा आया है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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