नयी दिल्ली, आर्सेलरमित्तल ने भारत में तीन नई स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना की योजना की घोषणा की। इन परियोजनाओं पर कुल 90 करोड़ डॉलर का पूंजीगत व्यय होगा। कंपनी का उद्देश्य देश में अपने हरित ऊर्जा क्षमता को दोगुना करके दो गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1 000 मेगावाट) तक पहुंचाना है। कंपनी ने बयान में कहा कि ये परियोजनाएं महाराष्ट्र राजस्थान और गुजरात में स्थापित की जाएंगी जिनकी संयुक्त क्षमता एक गीगावाट सौर और पवन ऊर्जा की होगी।
इन परियोजनाओं के पूरा होने पर भारत में आर्सेलरमित्तल की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता दोगुनी होकर दो गीगावाट हो जाएगी और कंपनी की कुल वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़कर 3.3 गीगावाट हो जाएगी।
तीनों परियोजनाओं पर कुल पूंजीगत व्यय 90 करोड़ डॉलर होने का अनुमान है और उत्पादित बिजली की आपूर्ति गुजरात स्थित इस्पात कंपनी एएमएनएस इंडिया को की जाएगी। एएमएनएस इंडिया लक्जमबर्ग स्थित आर्सेलरमित्तल और जापान की निप्पॉन स्टील का 60:40 का संयुक्त उद्यम है।
आर्सेलरमित्तल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आदित्य मित्तल ने कहा ‘‘हम भारत में अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को दोगुना कर रहे हैं जिससे हमारे भारतीय इस्पात उत्पादन संयंत्रों को स्वच्छ ऊर्जा की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित होगी और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में हमारी वैश्विक उपस्थिति मजबूत होगी।’’
बयान के अनुसार आर्सेलरमित्तल ने 2027 की पहली छमाही तक महाराष्ट्र के अमरावती में 36 मेगावाट की सौर परियोजना स्थापित करने की योजना बनाई है।
राजस्थान के बीकानेर में 400 मेगावाट सौर ऊर्जा और 500 मेगावाट पवन ऊर्जा बैटरी भंडारण परियोजना स्थापित की जाएगी। कंपनी ने इस परियोजना के जून 2028 तक पूरी होने की उम्मीद जतायी है।
एक अन्य 250 मेगावाट पवन ऊर्जा 300 मेगावाट सौर ऊर्जा और 300 मेगावाट पवन ऊर्जा एकीकृत बैटरी भंडारण परियोजना 2028 की पहली छमाही तक गुजरात के भचाऊ में स्थापित की जाएगी।
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