ईमानदारी केवल चरित्र की विशेषता नहीं, यह न्याय और प्रतिष्ठा दोनों को कायम रखती है: सीजेआई

सोनीपत भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि ईमानदारी केवल चरित्र की विशेषता नहीं है बल्कि यह एक ऐसा अनुशासन है जो न्याय और प्रतिष्ठा दोनों को बरकरार रखती है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कानून पाठ्यक्रम के छात्रों से कहा कि वे अपनी ईमानदारी को अपने चरित्र की मूल विशेषता बनाएं।

प्रधान न्यायाधीश ने ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में ‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता: अधिकारों संस्थाओं और नागरिकों के बारे में तुलनात्मक दृष्टिकोण’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यह बात कही।

इस अवसर पर दुनिया की सबसे बड़ी ‘मूट’ अदालत ‘न्यायाभ्यास मंडपम’ का उद्घाटन किया गया। साथ ही ‘इंटरनेशनल मूटिंग एकेडमी फॉर एडवोकेसी नेगोशिएशन डिस्प्यूट एडजुडिकेशन आर्बिट्रेशन एंड रेजोल्यूशन’ (आईएमएएएनडीएएआर)’ का भी उद्घाटन हुआ।

‘मूट कोर्ट’ एक नकली अदालत होती है जहां कानून के छात्र काल्पनिक मामलों का विश्लेषण करते हैं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सांसद व विश्वविद्यालय के कुलपति नवीन जिंदल तथा कानून क्षेत्र से जुड़े कई जाने-माने लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। सीजेआई ने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा “ईमानदारी वह चीज है जो आप तब करते हैं जब कोई नहीं देख रहा होता। साहस ऐसी चीज है जो आप तब दिखाते हैं जब सभी देख रहे होते हैं।” उन्होंने कहा आईएमएएएनडीएएआर वकालत वार्ता विवाद समाधान मध्यस्थता और निर्णय प्रक्रियाओं के लिए समर्पित है।”

सीजेआई ने कहा ईमानदारी केवल व्यक्तित्व का एक आभूषण नहीं है। यह वह अनुशासन है जो न्याय और प्रतिष्ठा दोनों को बनाए रखता है। एक ऐसे युग में जहां सत्य को ज्ञान से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है जहां डीपफेक चीजें वास्तविकता को तोड़ मरोड़कर पेश कर रही हैं दुष्प्रचार बढ़ रहा है और डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं सामान्य होती जा रही है वहां ईमानदारी और सत्यनिष्ठा अब केवल ऊंचे आदर्श नहीं हैं। वे जीवन के अस्तित्व के उपकरण बन चुके हैं।”क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडियाफोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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