नैनीताल, उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नियमों का उल्लंघन कर खेल के मैदान में झूले लगाए जाने के लिए नैनीताल नगर पालिका के अध्यक्ष की वित्तीय शक्तियों पर रोक लगाने और नगर निकाय के अधिशासी अधिकारी को निलंबित करने का मंगलवार को आदेश दिया।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने मामले में दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिए ।
मामले की सुनवाई के दौरान 10 अक्टूबर को खंडपीठ ने नगर पालिका को मैदान से झूले हटाने तथा इस संबंध में एक रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने के निर्देश दिए थे । झूले पूरी तरह से न हटाए जाने पर अदालत ने कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए ।
उच्च न्यायालय ने प्रदेश के मुख्य सचिव को मामले की जांच करने और 10 दिन में इस संबंध में अपनी रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने के भी निर्देश दिए हैं। अदालत ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी और अध्यक्ष पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है ।
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने नैनीताल नगर पालिका के अध्यक्ष की वित्तीय शक्तियों पर रोक लगाने का आदेश दिया। नगर पालिका ने मैदान में एक अक्टूबर से लेकर पांच नवंबर तक चलने वाले नंदा देवी मेले के दौरान झूले लगाने के लिए देहरादून के रमेश सजवाण को 6.75 लाख रुपये का ठेका दिया था ।
एक अन्य ठेकेदार किशन पाल भारद्वाज ने भी झूले लगाने के लिए अर्जी दी थी जिसे नगर पालिका ने खारिज कर दिया था। भारद्वाज ने बिना निविदाएं आमंत्रित किए प्रक्रिया पूरी करने का नगर पालिका पर आरोप लगाते हुए उसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी ।
अदालत ने इन अनियमितताओं की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश इरशाद हुसैन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की।
उच्च न्यायालय ने खेल के मैदान पर छह सप्ताह के लिए वाणिज्यिक गतिविधियों की अनुमति देने पर भी गंभीर रूख अपनाया और इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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