उत्तर कोरिया ने ठोस-ईंधन आधारित लंबी दूरी की मिसाइल का किया परीक्षण

             सियोल, उत्तर कोरिया ने कहा कि उसने पहली बार एक नव विकसित अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का परीक्षण किया है, जो अमेरिका की मुख्यभूमि को निशाना बना सकती है। उत्तर कोरिया की आधिकारिक ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ (केसीएनए) ने यह खबर ऐसे समय में दी है, जब एक दिन पहले उसके पड़ोसियों ने दावा किया था कि उत्तर कोरिया ने ठोस प्रणोदक पर आधारित एक आईसीबीएम दागी है।  उत्तर कोरिया 2022 की शुरुआत के बाद से 100 से अधिक मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है।

             कुछ विशेषज्ञों को अब भी संदेह है कि उत्तर कोरिया ने उन मिसाइलों पर रखे जाने के लिए बेहद छोटे ‘वॉरहेड’ बनाने और वायुमंडलीय क्षेत्र में फिर से दाखिल होने के दौरान ‘वॉरहेड’ की रक्षा करने की तकनीकों में महारत हासिल कर ली है।  मिसाइल के आगे के हिस्से को ‘वॉरहेड’ कहते हैं, जिसमें विस्फोटक भरा होता है।

             केसीएनए की खबर के अनुसार, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की निगरानी में प्रक्षेपण किया गया। मिसाइल का नाम ‘ह्वासोंग 18’ है। किम ने इसे अपने परमाणु बल का सबसे शक्तिशाली हथियार बताया जो अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों की सैन्य गतिविधियों का मुकाबला करने की क्षमता रखता है।

             खबर के अनुसार, किम ने अपने प्रतिद्वंद्वियों में ‘‘ निरंतर बेचैनी व दहशत’’ उत्पन्न करने के लिए अपने परमाणु शस्त्रागार का और विस्तार करने का संकल्प जताया ताकि उन्हें (प्रतिद्वन्द्वियों को) अपने गलत विकल्पों के लिए खेद महसूस हो।

             दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में ह्वासोंग-18 को ‘‘मध्य स्तर का परीक्षण’’ बताया और कहा कि उत्तर कोरिया को इस प्रणाली को पूरा करने के लिए अधिक समय व प्रयास की आवश्यकता होगी।

             मंत्रालय के अनुसार, उत्तर कोरिया की प्रौद्योगिकियों ने आईसीबीएम हथियारों को वायुमंडलीय क्षेत्र में फिर से दाखिल होने के दौरान ‘वॉरहेड’ की रक्षा करने की तकनीकों में महारत हासिल नहीं की है।

            उत्तर कोरिया इन परीक्षणों को अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास के खिलाफ अपनी रक्षा में उठाया गया कदम बताता है। उत्तर कोरिया इन संयुक्त सैन्य अभ्यास को युद्ध के लिए पूर्वाभ्यास करार देता है, जबकि अमेरिका और दक्षिण कोरिया इन सैन्य अभ्यासों को रक्षात्मक उपायों को बढ़ाने की कवायद कहते हैं।

             अंतर्निहित ठोस प्रणोदकों वाली आईसीबीएम को स्थानांतरित करना तथा छिपाना आसान होगा। इससे विरोधियों को प्रक्षेपण का पता लगाने तथा उसका मुकाबला करने का मौका कम मिलेगा और यह अधिक तेजी से कार्रवाई करने में सक्षम होगी।  इस प्रक्षेपण से पहले उत्तर कोरिया के पिछले सभी आईसीबीएम परीक्षणों में तरल ईंधन का इस्तेमाल किया गया था।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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