नयी दिल्ली, दिल्ली का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स-दिल्ली) वायु प्रदूषण विशेष रूप से महीन कण पदार्थ 2.5 और फेफड़ों के कैंसर के जोखिम के बीच संबंधों का अध्ययन कर रहा है। संस्थान ने दावा किया है कि ‘एयरकेयर’ नामक यह अध्ययन अपनी तरह का पहला अध्ययन है जिसकी अगुवाई विकिरण कर्करोग (रेडिएशन आंकोलॉजी) विज्ञान के सहायक प्रोफेसर अभिषेक शंकर कर रहे हैं।
डॉ. शंकर ने कहा कि वायु प्रदूषण एक गंभीर जन स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है इसलिए नीति निर्माण और रोग प्रबंधन के लिए अनुसंधान की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया के कुछ सबसे प्रदूषित शहर हैं और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रदूषण के पड़ने वाले प्रभावों का वैज्ञानिक रूप से अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक है। डॉ. शंकर ने कहा “भारत में पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर सबसे आम कैंसरों में से एक है। महिलाओं और युवाओं में गैर धूम्रपानकारी फेफड़ों के कैंसर के मामले भी काफी अधिक हैं।”
उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर का एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है लेकिन इस मुद्दे पर भारत से और अधिक प्रमाणों की आवश्यकता है। डॉ. शंकर ने कहा “यह बेहद चिंताजनक है कि जिसे फेफड़े के कैंसर को पहले मुख्य रूप से तंबाकू पीने वालों से जुड़ी बीमारी माना जाता था वह अब धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी तेजी से बढ़ रहा है।”
‘एयरकेयर’ अध्ययन में दिल्ली-एनसीआर में फेफड़ों के कैंसर के 1 615 मामलों का अध्ययन किया जाएगा। डॉ. शंकर ने बताया कि यह अध्ययन एक जटिल कार्य है जिसमें नैदानिक और गैर-नैदानिक दोनों घटक शामिल हैं।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common