बीजिंग, चीन ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग की कजाकिस्तान और फिर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में शामिल होने के लिए उज्बेकिस्तान की यात्रा अगले महीने होने वाले सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के कांग्रेस से पहले का ‘सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम’ है।
संभावना व्यक्त की जा रही है कि कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन में चिनफिंग को रिकॉर्ड तीसरे कार्यकाल के लिए चुना जा सकता है।
शी चिनफिंग (69) बुधवार को कजाकिस्तान जाएंगे और बाद में एससीओ के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पड़ोसी देश उज्बेकिस्तान के समरकंद जाएंगे। यह करीब ढाई साल पहले कोरोना वायरस महामारी आने के बाद से उनकी पहली विदेश यात्रा है।
एससीओ के सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और आठ सदस्यीय समूह के अन्य नेता भी भाग लेंगे।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने शी की यात्रा पर टिप्पणी करते हुए यहां प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘20वीं कांग्रेस से पहले राष्ट्र प्रमुख स्तर की कूटनीति में यह सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा जो एससीओ को चीन की ओर से दिये जाने वाले महत्व तथा कजाकिस्तान एवं उज्बेकिस्तान के साथ हमारे संबंधों को दर्शाता है।’’
2019 के बाद से पहली बार प्रत्यक्ष उपस्थिति के साथ हो रहे एससीओ के शिखर सम्मेलन पर लोगों की निगाहें रहेंगी और इसके इतर शी की पुतिन तथा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों की संभावना पर भी नजर रखी जाएगी।
माओ ने कहा कि कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान दोनों चीन के मित्रवत पड़ोसी देश हैं, समग्र रणनीतिक साझेदार हैं और बीआरआई (बॉर्डर रोड इनीशियेटिव) के महत्वपूर्ण सदस्य हैं।
उन्होंने कहा कि इन देशों में शी की राजकीय यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में एक नया चरण शुरू करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में हो रहे अनेक बदलाव तथा लंबी खिंची कोविड-19 महामारी ने क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता को कायम रखने एवं देशों के विकास व समृद्धि को बढ़ावा देने में एससीओ की भूमिका को और अच्छी तरह रेखांकित किया है।’’
हालांकि माओ ने दो दिवसीय सम्मेलन से इतर पुतिन समेत अन्य नेताओं के साथ शी की बैठकों के बारे में पुष्टि नहीं की।
माओ के अनुसार चीन और रूस के राष्ट्रपति लंबे समय से अनेक तरीकों से रणनीतिक संवाद करते रहे हैं और द्विपक्षीय सबंधों को हमेशा सही दिशा में रखते हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र प्रमुख स्तर की कूटनीति चीन-रूस के संबंधो में सतत और क्रमिक प्रगति के लिए सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक गारंटी है।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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