ऑस्ट्रियाई चांसलर क्रिश्चियन स्टोकर के भारत दौरे के मुख्य नतीजे

ऑस्ट्रियाई चांसलर क्रिश्चियन स्टोकर के भारत दौरे के दौरान कई समझौतों पर दस्तखत हुए और अहम घोषणाएं की गईं, जो सांस्कृतिक, आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के व्यापक विस्तार को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साझेदारी को एक नए दौर में प्रवेश करने वाला बताया, जो इनोवेशन और भविष्य के लिए तैयार सहयोग पर आधारित है।ऑडियो-विज़ुअल सह-निर्माण पर एक बड़ा समझौता किया गया, ताकि दोनों देशों के फिल्म उद्योगों के बीच सहयोग के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार किया जा सके। इससे संयुक्त फिल्म निर्माण, रचनात्मक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा मिलेगा। आर्थिक क्षेत्र में, भारतीय और ऑस्ट्रियाई कंपनियों और निवेशकों को पेश आने वाली समस्याओं की पहचान करने और उन्हें सुलझाने के लिए एक ‘फास्ट ट्रैक मैकेनिज्म’ स्थापित करने की संयुक्त घोषणा की गई।

यह मैकेनिज्म ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ (व्यापार करने में आसानी) से जुड़ी व्यापक चिंताओं को दूर करने के लिए एक मंच के तौर पर भी काम करेगा।सैन्य मामलों पर एक ‘लेटर ऑफ़ इंटेंट’ (आशय पत्र) के ज़रिए रणनीतिक सहयोग को मज़बूत किया गया। यह पत्र रक्षा सहयोग के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करता है, जिसमें रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी साझेदारी, नीतिगत संवाद, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण शामिल हैं। एक और ‘लेटर ऑफ़ इंटेंट’ आतंकवाद-रोधी सहयोग पर केंद्रित है, जिसमें दोनों पक्ष आतंकवाद से लड़ने में रणनीतिक समन्वय के क्षेत्रों का पता लगाने के लिए ‘आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह’ स्थापित करने की दिशा में काम करने पर सहमत हुए हैं।नियामक और खाद्य क्षेत्र में, ऑस्ट्रिया की AGES और भारत के ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) के बीच एक MoU पर दस्तखत किए गए। इसका मकसद खाद्य सुरक्षा मानकों, वैज्ञानिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और विनियमन व जोखिम मूल्यांकन में बेहतरीन तरीकों को साझा करने के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है।

उम्मीद है कि इससे कृषि और खाद्य उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही उच्च सुरक्षा मानकों को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसके अलावा, ‘दोहरी व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास’ पर एक संयुक्त ‘लेटर ऑफ़ इंटेंट’ के ज़रिए अप्रेंटिसशिप (प्रशिक्षुता) प्रणालियों में ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाया जाएगा, कौशल विकास के ढांचों को मज़बूत किया जाएगा और ऑस्ट्रियाई मानकों के अनुरूप भारतीय व्यावसायिक योग्यताओं को मान्यता दिलाने को बढ़ावा दिया जाएगा।इस दौरे के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं। इनमें सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तकनीकी सहयोग पर MoU का नवीनीकरण शामिल है, जिसमें इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, सड़क सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर खास ध्यान दिया गया है। दोनों पक्ष ‘इंडिया-ऑस्ट्रिया स्टार्टअप ब्रिज’ के तहत स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए, जिससे स्टार्टअप, इनोवेशन नेटवर्क और वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम के बीच और भी करीबी सहयोग संभव हो सकेगा।

डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को मज़बूत करने के लिए एक नए ‘इंस्टीट्यूशनल साइबर सुरक्षा संवाद’ की शुरुआत की गई, जबकि शांति स्थापना प्रशिक्षण और अभियानों में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत के ‘UN शांति स्थापना केंद्र’ और ऑस्ट्रिया के ‘AUTINT’ के बीच एक साझेदारी की घोषणा की गई।दोनों देश 2026 की पतझड़ ऋतु में वियना में एक द्विपक्षीय अंतरिक्ष उद्योग सेमिनार आयोजित करने पर भी सहमत हुए, जो अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते जुड़ाव का संकेत है।युवाओं की आवाजाही और लोगों के बीच आपसी मेलजोल को बढ़ावा देने के लिए ‘वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम’ शुरू किया गया।

उच्च-तकनीकी सहयोग को इस बढ़ी हुई साझेदारी का मुख्य आधार माना गया; दोनों पक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर बनी संयुक्त समिति के तहत सामग्री विज्ञान, क्वांटम प्रौद्योगिकी, अपशिष्ट जल उपचार, मशीन लर्निंग और लेज़र प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में मिलकर अनुसंधान और विकास परियोजनाएं शुरू करने पर सहमत हुए।इसके अलावा, उच्च और व्यावसायिक शिक्षा में कौशल विकास, पाठ्यक्रम निर्माण, योग्यताओं की आपसी मान्यता और संस्थागत सहयोग को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा सहयोग पर एक व्यवस्थित द्विपक्षीय बातचीत शुरू की जाएगी। ऑस्ट्रिया के प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालय भी “फोकस इंडिया” पहल शुरू कर रहे हैं, जिसमें भारतीय छात्रों के लिए इंजीनियरिंग और तकनीकी मास्टर कार्यक्रमों में दाखिला आसान बनाने के लिए एक विशेष पोर्टल भी शामिल है; इससे शैक्षणिक और अनुसंधान संबंधों को और मज़बूती मिलेगी।

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