शिवमोगा (कर्नाटक), केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने आश्वासन दिया है कि वह स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भगवद् गीता को शामिल करने के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ चर्चा करेंगे।
कुमारस्वामी के कार्यालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार जनता दल (सेक्यूलर) नेता ने यह टिप्पणी रविवार को यहां श्री भगवद् गीता अभियान कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता के एस ईश्वरप्पा के उस अनुरोध के जवाब में की जिसमें उन्होंने कहा था कि भगवद् गीता को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। कुमारस्वामी के अनुसार भगवद् गीता को केवल विद्यालयों और कॉलेज में ही नहीं बल्कि शिक्षा के सभी स्तरों पर पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे आवश्यक कार्रवाई के लिए इस मामले को केंद्र के ध्यान में लाएंगे।
कुमारस्वामी ने अपने संबोधन के दौरान यह भी सुझाव दिया कि रामायण और महाभारत को स्कूली स्तर पर पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन आदर्शों की नींव और भारत की पहचान के प्रतीक इन महाकाव्यों को पढ़ाना समाज का मार्गदर्शन करने और हिंसा व अशांति को समाप्त करने के लिए आवश्यक है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हाल ही में उडुपी में एक कार्यक्रम में भगवद् गीता का पाठ किए जाने का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा इसके जरिए उन्होंने हमारे धर्म और विरासत की रक्षा का स्पष्ट संदेश दिया। यह हम सभी के लिए एक सीख है।
उन्होंने कहा ‘‘बचपन में घर पर बड़े-बुजुर्ग हमें रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाया करते थे। इसी तरह विद्यालयों में भी शिक्षक हमें ये कहानियां सुनाया करते थे। हालांकि अब ऐसी अच्छी परंपरा गायब है। सुबह-सुबह न्यूज चैनल चालू करने पर सिर्फ बुरी खबरें ही आती हैं। इसलिए बच्चों को बचपन से ही भगवद् गीता पढ़ाई जानी चाहिए। इसके अलावा रामायण और महाभारत भी पढ़ाई जानी चाहिए।’’
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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