पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में ‘कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट’ (CAQM) के नए विकसित ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ (I3C) का दौरा किया। इसे ‘PAVAN’ (NCR के लिए वायु गुणवत्ता निगरानी और विश्लेषण मंच) नाम दिया गया है। मंत्री ने इसके तकनीकी ढांचे और परिचालन तैयारियों की समीक्षा की। एक ‘सिंगल-विंडो डिजिटल नर्व सेंटर’ के रूप में विकसित, PAVAN-I3C में 30 से अधिक API और डेटा स्ट्रीम शामिल हैं। इसमें कई एजेंसियों से प्राप्त वायु गुणवत्ता, उत्सर्जन, मौसम संबंधी जानकारी, सैटेलाइट डेटा, कैमरे, मोबिलिटी, शिकायतों और अनुपालन (compliance) से जुड़ा डेटा शामिल है।
इसके अलावा, इसमें दिल्ली-NCR में काम कर रहे 111 ‘कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों’ (CAAQMS), 2,300 से अधिक उद्योगों, 3,200 से ज्यादा सक्रिय निर्माण स्थलों और ट्रैफिक जाम वाले हॉटस्पॉट का डेटा भी एकीकृत किया गया है।समीक्षा के दौरान मीडिया से बात करते हुए, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय वायु प्रदूषण से निपटने में पहली प्राथमिकता सटीक, हाइपर-लोकल डेटा और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि PAVAN-I3C की शुरुआत एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि यह काम में होने वाली देरी को खत्म करता है, डेटा के अलग-अलग बिखरे हुए स्रोतों (डेटा साइलो) को हटाता है, और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (SPCBs) को जानकारी के एक ही सत्यापित स्रोत के तहत काम करने में सक्षम बनाता है। इससे प्रदूषण फैलाने वालों को कुछ ही मिनटों में जवाबदेह ठहराया जा सकेगा। इस पहल की सराहना करते हुए, श्री यादव ने कहा, “केवल एक एजेंसी या एक राज्य के अकेले काम करने से साफ हवा नहीं मिल सकती। I3C सभी महत्वपूर्ण डेटा को एक ही स्क्रीन पर लाता है, ताकि खेतों में आग लगने, प्रदूषण फैलाने वाली चिमनियों या बिना ढके निर्माण स्थलों का तुरंत पता चल सके, उन्हें चिह्नित किया जा सके और उन पर रियल-टाइम में कार्रवाई की जा सके। यह प्रदूषण होने के बाद प्रतिक्रिया देने से हटकर, प्रदूषण का पहले से अनुमान लगाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
अब सभी संबंधित एजेंसियों को इन अलर्ट पर बिना किसी देरी के तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।” मंत्री ने आगे कहा कि PAVAN-I3C प्लेटफॉर्म की मदद से नियमों का पालन न करने वाले उद्योगों, प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों और ट्रैफिक जाम वाले इलाकों पर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी। इसी संदर्भ में, उन्होंने बताया कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए NCR क्षेत्र में 5 से 20 नवंबर तक निर्माण और विध्वंस (C&D) गतिविधियों पर रोक रहेगी।श्री यादव ने बताया कि ‘पता लगाएं, विश्लेषण करें, कार्रवाई करें’ (Detect, Analyse, Act) के सिद्धांत पर काम करने वाला PAVAN-I3C, कई एजेंसियों के डेटा को एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाता है। इससे प्रदूषण के स्तर का रियल-टाइम और ऐतिहासिक विश्लेषण किया जा सकता है, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान हो सकती है, रुझानों और उठाए गए कदमों की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सकता है, और तय मानकों व कार्य योजनाओं के अनुसार जमीनी स्तर पर नियमों के पालन की निगरानी की जा सकती है। यह व्यापक, रियल-टाइम वायु गुणवत्ता निगरानी और डेटा-आधारित प्रवर्तन (enforcement) की दिशा में एक बड़ा कदम है।
PAVAN-I3C की एक खास खूबी इसका अलर्ट-आधारित अनुपालन प्रबंधन (compliance management) है। श्री यादव ने बताया कि जब तय नियमों, कानूनी निर्देशों या अनुपालन आवश्यकताओं का पालन नहीं किया जाता है, तो सिस्टम अलर्ट जारी करता है और संबंधित एजेंसी को आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचित करता है। इससे CAQM (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) की कार्यप्रणाली में बदलाव आता है—अब यह केवल एजेंसियों द्वारा दी गई रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय, सक्रिय, डिजिटल और डेटा-आधारित अनुपालन प्रबंधन की ओर बढ़ रही है, जिससे समय रहते हस्तक्षेप और नियामक कार्रवाई करना संभव हो जाता है। उन्होंने आगे कहा कि कई एजेंसियों से वायु गुणवत्ता डेटा को एक साथ लाकर, I3C एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत करेगा, नियमों के पालन को तेज करेगा, लोगों की शिकायतों का जल्दी समाधान करेगा और खास मौसम के दौरान अचानक बढ़ने वाले स्थानीय प्रदूषण पर तुरंत कार्रवाई करने में मदद करेगा। इससे नागरिकों पर केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित होगा।इस दौरे के दौरान, यादव ने कई अहम मॉनिटरिंग मॉड्यूल की समीक्षा की।
इनमें शामिल हैं: CPCB, IMD और SPCBs द्वारा लगाए गए CAAQMS से मिली वायु गुणवत्ता और प्रदूषकों की मात्रा; OCEMS (ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम) से मिला उद्योगों से निकलने वाले PM, SO₂, NOx और CO का डेटा; IARI, ISRO और FIRMS से मिला फसल अवशेष जलाने (पराली जलाने) का सैटेलाइट डेटा (जिसमें पिछले छह सालों की घटनाओं से तुलना भी शामिल है); निर्माण और तोड़फोड़ (C&D) वाली जगहों पर लगे लाइव कैमरे और PM सेंसर; मौसम, बारिश, हवा की गति और दिशा, तथा नमी का डेटा; ओखला, भलस्वा, गाजीपुर, ग्रेटर नोएडा और भांडवारी जैसी प्रमुख लैंडफिल साइटों से लाइव फीड; ‘वाहन’ (VAHAN) पोर्टल के जरिए वाहनों का डेटा और ट्रैफिक जाम वाले इलाके; ‘ग्रीन दिल्ली’ ऐप और ‘समीर’ (SAMEER) ऐप के जरिए नागरिकों की शिकायतें; सड़कों की सफाई करने वाली मशीनों (MRSMs) की लाइव ट्रैकिंग; और हरियाणा तथा पंजाब के ईंट-भट्टों द्वारा बायोमास-ईंधन के तय नियमों का पालन।
‘स्टेट एक्शन प्लान’ मॉनिटरिंग मॉड्यूल दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लिए राज्य, सेक्टर और एक्शन-पॉइंट स्तर पर लंबित कार्यों की एक पूरी तस्वीर पेश करता है। इसमें वायु गुणवत्ता की निगरानी, फसल अवशेष प्रबंधन, वाहनों से होने वाला प्रदूषण, निर्माण और तोड़फोड़ (C&D) की गतिविधियां, सड़क की धूल का प्रबंधन, नगरपालिका के ठोस कचरे का प्रबंधन, औद्योगिक प्रदूषण, DG सेट और पर्यावरण के अनुकूल श्मशान घाट जैसे विषय शामिल हैं।इस अवसर पर मौजूद गणमान्य व्यक्तियों में CAQM के अध्यक्ष राजेश वर्मा; CPCB के अध्यक्ष और MoEFCC के अतिरिक्त सचिव डॉ. अमनदीप गर्ग के साथ-साथ मंत्रालय, CAQM और CPCB के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।https://x.com/byadavbjp/status/2116153604122017833/photo/2