भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रेल, सूचना एवं प्रसारण, तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज ‘सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम’ के तहत पिलर 2, 3 और 4 के लिए “सेमीकॉन 2.0 – वेब एप्लिकेशन पोर्टल” लॉन्च किया। इसके साथ ही, उन्होंने ‘इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ (ECMS) के तहत 12 स्वीकृत आवेदकों की भी घोषणा की।भारत सरकार देश में एक मजबूत और लचीला सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम स्थापित करने के लिए कई रणनीतिक पहलों और नीतिगत हस्तक्षेपों के माध्यम से ठोस प्रयास कर रही है।अपनी स्थापना के कुछ ही वर्षों के भीतर, ISM (इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन) ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास को गति दी है।
‘सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम’ (सेमीकॉन 1.0) के पहले चरण के सफल कार्यान्वयन के तहत, छह राज्यों में 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इन 12 परियोजनाओं में से 05 परियोजनाओं में अक्टूबर 2026 तक व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।इसके अलावा, 105 स्टार्टअप्स को EDA टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं, 24 स्टार्टअप्स को फंडिंग के जरिए सहायता दी गई है, और 15 स्टार्टअप्स को वेंचर कैपिटल फंडिंग प्राप्त हुई है।
‘चिप्स टू स्टार्टअप’ (C2S) कार्यक्रम के तहत 332 संस्थानों को EDA टूल्स दिए गए हैं, और अब तक लगभग 70,000 छात्रों को प्रशिक्षित किया गया है।केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM) के तहत 1,27,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी दी है। भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा के अगले चरण के रूप में, ‘सेमीकॉन 2.0’ छह रणनीतिक स्तंभों (pillars) पर केंद्रित है:•
स्तंभ 1: चिप्स की डिजाइनिंग•
स्तंभ 2: मशीनें और सामग्री• स्तंभ 3: और अधिक फैब (Fabs) स्थापित करना• स्तंभ 4: ATMP/OSAT उद्योग को और मजबूत करना•
स्तंभ 5: अनुसंधान और विकास (R&D)•
स्तंभ 6: प्रतिभा विकास (टैलेंट डेवलपमेंट)’सेमीकॉन 2.0′ वेब एप्लिकेशन पोर्टल के लॉन्च के साथ, अब स्तंभ 2, 3 और 4 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है।इस अवसर पर बोलते हुए, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, रेल तथा सूचना और प्रसारण मंत्री, अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण यात्रा अब केवल असेंबली (जोड़-तोड़) से आगे बढ़कर एक व्यापक घरेलू वैल्यू चेन के विकास की ओर बढ़ गई है,
जिसमें मॉड्यूल, कंपोनेंट्स, सामग्री और उन्नत तकनीकें शामिल हैं। उन्होंने बैटरी सेल, कॉपर फॉयल, कॉपर-क्लैड लैमिनेट और हाई-एंड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड के क्षेत्र में बढ़ती क्षमताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सरकारी पहल से घरेलू सप्लाई चेन मजबूत हो रही है और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) के लिए अवसर पैदा हो रहे हैं; इस योजना के तहत मंजूर की गई इकाइयों में से लगभग 50% MSME क्षेत्र से जुड़ी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘सेमीकॉन इंडिया 2.0’ का मुख्य फोकस एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने पर होगा, खासकर उपकरण, सामग्री, रसायन और गैसों के क्षेत्र में। इसका लक्ष्य कम से कम तीन प्रमुख उपकरण निर्माताओं और पांच रसायन व गैस कंपनियों को भारत में लाना है।
परियोजनाओं के चयन में पूरी सावधानी बरतने की बात कहते हुए, उन्होंने जोर दिया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप, देश के सेमीकंडक्टर लक्ष्यों को हासिल करने के लिए गुणवत्ता, तकनीकी गहराई, R&D (अनुसंधान और विकास) और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को आधार बनाना चाहिए। उन्होंने उद्योग जगत के हितधारकों से आग्रह किया कि वे आपस में सहयोग करें, अपनी विशेषज्ञता साझा करें और लगातार सुधार करते रहें, ताकि भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण के एक ऐसे केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो।इससे पहले 69,548 करोड़ रुपये के निवेश वाली 106 आवेदनों को मंजूरी दी गई थी। इसी क्रम में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ‘इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ (ECMS) के तहत 12 और आवेदनों को मंजूरी दी है,
जिनमें 7,503 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है।इन मंजूरियों से 39,045 करोड़ रुपये के उत्पादन का अनुमान है और इनसे 7,127 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।इन मंजूरियों में 10 लक्षित श्रेणियों के उत्पादों का निर्माण शामिल है, जिनमें बेयर कंपोनेंट्स (मूल घटक), सप्लाई चेन उत्पाद और कैपिटल गुड्स (पूंजीगत सामान) आते हैं। इनमें 4 कंपोनेंट्स – मल्टी-लेयर PCB, रिले, हीट सिंक और स्पेशलिटी सिरेमिक्स; 5 सप्लाई चेन उत्पाद – कॉपर फॉयल, एनोड मटेरियल, कैथोड एक्टिव मटेरियल, पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म और कैमरा रिम; तथा कैपिटल गुड्स और उनके पुर्जे शामिल हैं।ये मंजूर परियोजनाएं 7 राज्यों – गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश – में फैली हुई हैं, जिससे देश में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण का भौगोलिक दायरा और बढ़ेगा।इन मंजूरियों में कॉपर फॉयल, कैथोड एक्टिव मटेरियल और स्पेशलिटी सिरेमिक्स के लिए ECMS (इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम) के तहत पहली बार मंजूरी दी गई है। इससे देश में बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और कच्चे माल (अपस्ट्रीम मटेरियल) की रेंज और विस्तृत होगी।
कंपोनेंट्स श्रेणी में, निर्माण के लिए निम्नलिखित मंजूरियां दी गई हैं: नेस्ट ICELR प्राइवेट लिमिटेड को मल्टी-लेयर PCB के लिए; TDConnex (चेन्नई) प्राइवेट लिमिटेड को रिले के लिए; मॉडर्न ऑटोमोटिव्स लिमिटेड को हीट सिंक के लिए; और वोल्टिक्स सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड को स्पेशलिटी सिरेमिक्स के लिए।इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए, विभिन्न सप्लाई चेन उत्पादों के निर्माण हेतु भी मंजूरियां दी गई हैं: इंडो एशिया कॉपर लिमिटेड को कॉपर फॉयल (जो PCB के लिए कॉपर क्लैड लैमिनेट – CCL और Li-ion सेल के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट है) के निर्माण के लिए; TACC लिमिटेड को Li-ion सेल के लिए एनोड मटेरियल के लिए; विद्युत मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड को कैथोड एक्टिव मटेरियल के लिए; एनरफोली LLP को पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म (कैपेसिटर-ग्रेड डाइइलेक्ट्रिक फिल्म) के लिए; और सरफेस मॉडिफिकेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को कैमरा रिम के निर्माण के लिए।साथ ही, इन मंजूरियों में कैपिटल गुड्स और उनके पुर्जों के लिए घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
इसके तहत, TDConnex (चेन्नई) प्राइवेट लिमिटेड को प्रिसिजन मोल्ड्स और टूलिंग के लिए; रॉकवेल ऑटोमेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को कैपिटल इक्विपमेंट (पूंजीगत उपकरणों) के लिए पावर और कंट्रोल सिस्टम के लिए; और विप्रो परी रोबोटिक्स प्राइवेट लिमिटेड को फैक्ट्री ऑटोमेशन और सिस्टम इंटीग्रेशन से जुड़े कैपिटल इक्विपमेंट के निर्माण के लिए मंजूरी दी गई है। इन मंजूरियों के साथ, ECMS के तहत कुल 118 आवेदनों को मंजूरी दी गई है। इनमें 16 राज्यों के 34 उत्पाद शामिल हैं। इससे 77,051 करोड़ रुपये का निवेश, 5,73,146 करोड़ रुपये का संभावित उत्पादन और 81,755 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।ये मंजूरियां घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करेंगी, वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देंगी, आयात पर निर्भरता कम करेंगी और उन्नत विनिर्माण क्षमताएं विकसित करेंगी।
इससे भारत के एक वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने की प्रक्रिया और तेज होगी।मीडिया से बात करते हुए, अश्विनी वैष्णव ने कहा, “पिछले एक दशक में भारत में एक बड़ा बदलाव आया है। हालांकि, यह तो बस शुरुआत है। कई नीतिगत पहलों और सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों के मिले-जुले प्रयासों से सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के विकास की नींव रखी जा रही है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करने में मदद करेगी।” भारत अपने घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूत कर रहा है। देश के भीतर कंप्यूटर और उनके पुर्जों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके और एक मजबूत, आत्मनिर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन तैयार की जा सके।https://x.com/PIB_India/status/2118696891542348248/photo/1