केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने नई दिल्ली स्थित अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान (ABVIMS) और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (डॉ. आरएमएल अस्पताल) में हो रहे कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने मरीजों की देखभाल, विशेष सेवाओं, सेवा वितरण और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित किया। अपने दौरे के दौरान, उन्होंने अस्पताल की उपलब्धियों और आगामी परियोजनाओं का जायजा लिया।
समीक्षा बैठक के दौरान एक प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) के माध्यम से, मंत्री को अस्पताल की क्लिनिकल सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान गतिविधियों और गुणवत्ता सुधार की पहलों के बारे में जानकारी दी गई। प्रस्तुति में अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या पर प्रकाश डाला गया; वर्ष 2025 में यहाँ 19.4 लाख आउटपेशेंट (बाह्य रोगी) आए, 82,500 से अधिक इनपेशेंट (भर्ती मरीज) रहे और 96,600 से अधिक सर्जरी व अन्य प्रक्रियाएं की गईं। वर्तमान में, अस्पताल में 30 क्लिनिकल और मरीज-देखभाल विभाग, तथा आठ प्री-क्लिनिकल और पैरा-क्लिनिकल विभाग हैं।
प्रस्तुति के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि 2025 में अस्पताल को ‘नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स’ (NABH) की पूर्ण मान्यता प्राप्त हुई है। डॉ. आरएमएल अस्पताल यह उपलब्धि हासिल करने वाला केंद्र सरकार का पहला मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल बन गया है।
अस्पताल में गुणवत्ता सुधार के उपायों में पंजीकरण और ट्राइएज (मरीजों की प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया) को मजबूत करना, क्लिनिकल और प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट, घटनाओं की रिपोर्टिंग, दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की रिपोर्टिंग और मरीजों से फीडबैक लेने की व्यवस्था शामिल है।सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, अस्पताल ने ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB PM-JAY) के कियोस्क की संख्या भी एक से बढ़ाकर तीन कर दी है। PM-JAY प्री-ऑथराइजेशन अनुरोधों की संख्या 2022 में 549 से बढ़कर 2025 में 1,516 हो गई।इस प्रेजेंटेशन में संस्थान के शैक्षणिक और शोध योगदान को भी दिखाया गया, जिसमें 2,200 से अधिक शोध प्रकाशन शामिल हैं। ‘विकसित भारत 2047’ के लिए इसके रोडमैप में डिजिटल और मरीज-केंद्रित देखभाल, बेहतर विशेष सेवाएं, सैटेलाइट क्लीनिक के जरिए सामुदायिक पहुंच का विस्तार, AI-आधारित निगरानी, और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर की परिकल्पना की गई है।
समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए, जे.पी. नड्डा ने जोर दिया कि बड़े हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की योजना बनाते समय प्रमुख संस्थानों की विशेषज्ञता और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) का लाभ उठाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने डॉ. आरएमएल अस्पताल में ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ (ABDM) को और अधिक मजबूती से लागू करने का आह्वान किया। इसमें ABDM के नियमों का पालन करना, ई-प्रिस्क्रिप्शन को व्यापक रूप से अपनाना और मरीजों की देखभाल व सेवा वितरण को बेहतर बनाने के लिए अन्य डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को शामिल करना जरूरी है।मंत्री ने छात्रों और फैकल्टी के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, और शैक्षणिक व पेशेवर जीवन पर तनाव के प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने आपसी सहयोगपूर्ण संबंधों, खुलकर बातचीत करने और निरंतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता की वकालत की। आरएमएल अस्पताल नियमित रूप से छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और फैकल्टी सदस्यों के लिए स्वास्थ्य जांच (हेल्थ चेक-अप) आयोजित करता है। इसके अलावा, मंत्री ने संस्थान में ‘प्रोजेक्ट सारथी’ को लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया और इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया।मंत्री ने ‘विशेष अभियान 6’ (Special Campaign 6) के तहत डॉ. आरएमएल (RML) अस्पताल द्वारा की गई
गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने स्वच्छता को संस्थागत रूप देने, लंबित मामलों को कम करने, रिकॉर्ड का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करने और एक साफ-सुथरे, स्वच्छ तथा मरीजों के अनुकूल स्वास्थ्य सेवा माहौल बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।इस समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव; स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) एल.जी. कृष्णा; संयुक्त सचिव (स्वास्थ्य) जी.एस. चित्रा; एबीवीआईएमएस (ABVIMS) और डॉ. आरएमएल अस्पताल की निदेशक डॉ. अखिलंदेश्वरी प्रसाद; डॉ. आरएमएल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. (प्रो.) विवेक दीवान; तथा संस्थान और अस्पताल के अन्य अधिकारी और फैकल्टी सदस्य शामिल हुए।https://x.com/JPNadda/status/2113633598767337917/photo/2