केन्या ने कांगो से आए इबोला के पहले मामले की पुष्टि की, नैरोबी में इलाज के दौरान मरीज की मौत

नैरोबी, केन्या के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को देश में कांगो से आए इबोला के पहले मामले की पुष्टि की। स्वास्थ्य मंत्री एडेन डुएले ने बताया कि कांगो से युगांडा होते हुए शनिवार को देश पहुंचे एक केन्याई नागरिक को उपचार के दौरान नैरोबी के अस्पताल में पृथक-वास में रखा गया था। हेमोरेजिक फीवर (रक्तस्रावी बुखार) जैसे लक्षण दिखने के बाद जांच में मरीज के इबोला वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई।

इलाज के दौरान सोमवार देर रात मरीज की मौत हो गई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने देश को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा है और संभावित रूप से सामने आने वाले अन्य मामलों पर नजर रखी जा रही है। डुएले ने बताया कि 28 लोगों की पहचान की गई है जो मरीजों के संपर्क में आए थे इनमें परिवार के सदस्य और मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। युगांडा से उसी उड़ान में यात्रा करने वाले 23 अन्य यात्रियों का भी पता लगाया जा रहा है। मंत्रालय के निदेशक पैट्रिक अमोथ ने बताया कि इन लोगों को 21 दिनों तक पृथक-वास में रखा जाएगा और जांच में वायरस की पुष्टि नहीं होने पर ही उन्हें छोड़ा जाएगा। जन-सुरक्षा के तय नियमों के अनुसार मृतक को 24 घंटे के भीतर दफना दिया जाएगा।

केन्या चौथा ऐसा देश है जहां मौजूदा इबोला प्रकोप में संक्रमण का मामला सामने आया है। इस प्रकोप की घोषणा मई के मध्य में कांगो के पूर्वी हिस्से में की गई थी। युगांडा में 20 मामले और फ्रांस में एक मामला सामने आया है। केन्या में मामला सामने आने से पहले अगस्त के अंत में युगांडा ने अपने यहां प्रकोप समाप्त होने की घोषणा की थी जिसके बाद कांगो के बाहर इबोला का कोई सक्रिय मामला नहीं आया था।

यह इतिहास में सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यह अब तक का सबसे घातक प्रकोप बन सकता है क्योंकि इसके फैलने की गति इसे रोकने और संक्रमित लोगों का पता लगाने के प्रयासों से अधिक है।

यह प्रकोप दुर्लभ बुंदिबुग्यो वायरस के कारण हुआ है जिसके लिए अभी कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। प्रकोप के केंद्र रहे कांगो के इतुरी प्रांत में टीके और उपचार के परीक्षण किए जा रहे हैं।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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