मॉस्को, भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि वह अफगान लोगों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार और संयुक्त सचिव (पीएआई) डॉ. एम. सुरेश कुमार के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को यहां रूस की मेजबानी में आयोजित ‘अफगानिस्तान पर आठवें मॉस्को फॉर्मट परामर्श’ के दौरान नयी दिल्ली का रुख सामने रखा।
इस बैठक में रूस भारत ईरान कजाखस्तान चीन किर्गिस्तान पाकिस्तान ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने अपने देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। बेलारूस और मिस्र अतिथि के रूप में बैठक में शामिल हुए।
रूस में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा ‘‘अफगानिस्तान के साथ लंबे समय से चली आ रही मित्रता के आधार पर भारत अफगान लोगों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और अफगानिस्तान की संप्रभुता एकता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है।’’ रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने इस बात की पुष्टि की कि काबुल के साथ समान और पारस्परिक रूप से लाभकारी आधार पर सहयोग विकसित करने तथा अफगानिस्तान को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एकीकृत करने के प्रयासों का समर्थन करने का कोई विकल्प नहीं है।
उसने कहा कि प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगान लोगों को नियमित मानवीय सहायता मुहैया कराने का आह्वान किया और इस बात पर जोर दिया कि ऐसी सहायता का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपने संबोधन में कहा कि यह मंच उन देशों को एक साथ लाता है जिनके अफगान लोगों के साथ समान और पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी स्थापित करने और बनाए रखने में हित हैं। उन्होंने कहा ‘‘यह अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय सहायता मुहैया कराने से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा का अवसर प्रदान करता है और महत्वपूर्ण बात यह है कि यह काम काबुल के साथ मिलकर किया जा सकता है।’’
लावरोव ने कहा कि अगस्त 2026 में ‘‘अफगानिस्तान की दो दशक लंबे पश्चिमी कब्जे से मुक्ति’’ की पांचवीं वर्षगांठ मनाई गई। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों की विशाल सैन्य मशीन अफगान लोगों की लड़ने की भावना और दृढ़ संकल्प के सामने ढह गई और ‘‘कब्जाधारियों को भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।’’
लावरोव ने अफगानिस्तान द्वारा ‘‘आईएसआईएस और अन्य आतंकवादी समूहों के खिलाफ अडिग लड़ाई’’ तथा मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के प्रयासों की सराहना की। सरकारी समाचार एजेंसी तास के अनुसार लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद अफगान अर्थव्यवस्था का विकास जारी है। उन्होंने पश्चिमी देशों पर मानवाधिकारों की रक्षा के बहाने अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से अलग करने और उसकी राष्ट्रीय बैंकिंग परिसंपत्तियों को जब्त करने का आरोप लगाया।
मॉस्को फॉर्मेट की स्थापना 2017 में हुई थी और इसमें रूस अफगानिस्तान भारत ईरान चीन तथा पाकिस्तान सहित 11 देशों के विशेष प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस मंच का मुख्य उद्देश्य अफगानिस्तान में राष्ट्रीय सुलह को बढ़ावा देना और देश में जल्द से जल्द शांति स्थापित करना है।
बैठक से इतर लावरोव ने अफगान विदेश मंत्री मुत्तकी के साथ अलग से बातचीत की। दोनों ने द्विपक्षीय सहयोग विकसित करने तथा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों पर मिलकर काम करने की संभावनाओं पर चर्चा की।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common