नयी दिल्ली, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को मसौदा बीज विधेयक 2025 पर चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि यह किसानों के खेत में बचे बीजों को बोने बचाने अदला बदली करने और बेचने के अधिकारों की रक्षा करता है। साथ ही गैर-कानूनी बीजों के उत्पादन और बिक्री के लिए कड़े जुर्माने का भी प्रावधान करता है। चौहान ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार ने गैर-कानूनी बीज उत्पादन को रोकने के लिए 30 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव दिया है जो वर्ष 1966 के बीज कानून के तहत मौजूदा 500 रुपये के जुर्माने से काफी ज्यादा है।
उन्होंने कहा ‘‘यह गलतफहमी फैलाई जा रही है कि इससे पारंपरिक बीज प्रभावित होंगे। यह सच नहीं है।’’ मंत्री ने साफ किया कि विधेयक के नियम किसानों और पारंपरिक किस्मों सहित उनकी किस्मों पर लागू नहीं होते हैं। उन्होंने कहा ‘‘किसान अपने बीज खुद बो सकते हैं। किसान दूसरे किसानों को बीज दे सकते हैं।’’ पारंपरिक प्रणाली जिसमें किसान बुवाई के समय बीज उधार लेते हैं और बाद में सवा गुना रकम लौटाते हैं बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। चौहान ने कहा कि कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले बीजों के लिए विधेयक में उद्गम स्थल जानने के उपाय बताए गए हैं। ‘अगर यह पाया जाता है कि बीज घटिया हैं या उनमें अंकुरण नहीं हो रहा है या कोई और समस्या आती है तो सजा के तौर पर कार्रवाई की जाएगी।’’ उन्होंने बताया कि जानबूझकर किए गए गंभीर अपराधों के लिए जेल के प्रावधान शामिल किए गए हैं।
बीज विधेयक छह दशक पुराने बीज कानून की जगह लेगा। इसमें पैकेट पर ‘क्यूआर कोड’ जैसे आधुनिक मानकों के साथ गुणवत्ता और उद्गम स्थल का पता सुनिश्चित करने के लिए बीज की किस्मों डीलरों और उत्पादकों के लिए पंजीकरण को जरूरी बनाया गया है। इसमें निगरानी के लिए केन्द्रीय और राज्य बीज समितियों की स्थापना का प्रस्ताव है जबकि किसानों को बिना पंजीकरण के खेत में बचाए गए बीजों को बचाने और लेन-देन करने की अनुमति दी गई है। कृषि मंत्रालय मसौदा विधेयक पर मिले सुझावों के साथ 9 000 आवेदनों पर काम कर रहा है। सरकार का अगले महीने बजट सत्र के पहले चरण में विधेयक पेश करने का लक्ष्य है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडियाफोटो क्रेडिट : Wikimedia common