हैदराबाद देश में कोयला खदान परिचालकों ने पिछले तीन वर्षों में खदानों को क्रमिक रूप से बंद करने पर लगभग 3 000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
खान मंत्रालय के सचिव वी एल कांता राव ने विश्व खनन कांग्रेस (आईएनसी डब्ल्यूएमसी) की भारतीय राष्ट्रीय समिति को संबोधित करते हुए कहा कि जब गैर-कोयला क्षेत्र की बात आती है तो भारतीय खान ब्यूरो के महानियंत्रक यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी 1 200 खदानें क्रमिक रूप से बंद किए जाने की गतिविधियां संचालित कर रही हैं।
राव ने कहा कोयला नियंत्रक ने यह सुनिश्चित किया है कि मौजूदा कोयला खदानों में लगभग 500 कोयला खदानें हैं और लोगों ने पिछले तीन वर्षों में क्रमिक रूप से खदान बंद करने पर लगभग 3 000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इसका सारा श्रेय कोयला नियंत्रक को जाता है जिन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि परिचालक न केवल कोयला खदान बंद होने पर बल्कि हर पांच साल में खर्च करें।
राव ने कहा कि गैर-कोयला के मामले में राज्य सरकारें खदान बंद करने में थोड़ी धीमी रही हैं क्योंकि जब्त की गई राशि उन्हें भारतीय खान ब्यूरो के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने अपने संबोधन में कहा कि नीलामी व्यवस्था शुरू होने के बाद से अब तक 500 खनिज ब्लॉकों की नीलामी की जा चुकी है जिसमें से पिछले साल ही 119 की नीलामी की गई है।
उन्होंने कहा कि नीतिगत बदलावों ने खनन में व्यवसाय करना आसान बना दिया है और निजी कंपनियों को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया है। रेड्डी ने कहा पट्टे के नवीनीकरण अनुमतियों के आसान हस्तांतरण राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट के माध्यम से वित्तीय सहायता और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए पहली बार अन्वेषण लाइसेंस की शुरुआत के कारण अब कोई देरी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने इतिहास में पहली बार एक अरब टन से अधिक कोयला उत्पादन करते हुए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। रेड्डी ने कहा कि कोयला आयात 7.9 प्रतिशत घटकर 2025 में 24.3 करोड़ टन तक गिर गया है। इस अवसर पर किशन रेड्डी ने एल्युमीनियम और तांबा क्षेत्र पर अलग-अलग दृष्टि-पत्र जारी किए।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडियाफोटो क्रेडिट : Wikimedia common