मेलबर्न, क्या डोनाल्ड ट्रंप फासीवादी हैं ट्रंप के अधीन काम कर चुके ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के पूर्व अध्यक्ष जनरल मार्क मिल्ली ऐसा मानते हैं। वह चेतावनी देते हुए कहते हैं कि ट्रंप ‘‘पूरी तरह से फासीवादी हैं।’’ ट्रंप के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ जॉन केली भी इससे सहमति जताते हैं। इस साल के राष्ट्रपति चुनाव में उनकी प्रतिद्वंद्वी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस भी इस बात से सहमत हैं। लेकिन इतिहास पर पकड़ रखने वाले राजनीतिक टिप्पणीकार पुख्ता तौर पर ऐसा नहीं मानते। द गार्डियन में लिखते हुए सिडनी ब्लूमेनथल ने ट्रंप को ‘हिटलरवादी’ और उनकी जनसभाओं को ‘नाजीवादी’ कहा लेकिन उन्हें फासीवादी कहने से बचते रहे। न्यू रिपब्लिक के माइकल टॉमस्की इस संदेह वाली स्थिति को समझते हैं लेकिन वे ‘फासीवादी’ और सिर्फ ‘फासीवादी’ के बीच अंतर पर बहस करने में समय बर्बाद करने से ऊब गए हैं। टॉमस्की लिखते हैं ‘‘वह काफी करीब है और बेहतर होगा कि हम लड़ें’’। मैं इस तर्क को समझता हूं। यही कारण है कि हैरिस अमेरिकी जनता को 911 कॉल भेजने के मामले में ट्रंप का वर्णन करने के लिए ‘फासीवादी’ शब्द का उपयोग करती हैं।’’ लेकिन एक समस्या है। मैंने पिछले छह साल अमेरिका में दक्षिणपंथी सत्तावादी राजनीतिक संचार पर शोध करते हुए बिताए हैं। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि इस तरह के लेबल कैसे गलत साबित हो सकते हैं। उन्हें बहुत आसानी से उदारवादी उन्माद की तरह दिखाया जा सकता है जो सीधे दक्षिणपंथियों के हाथों में खेल रहा है। पुतिन के लिए ट्रंप की प्रशंसा सार्वजनिक है। स्टीव बैनन जैसे ट्रंप के साथ प्रभावशाली दक्षिणपंथी विचारकों के लिए पुतिन एक खाका प्रदान करते हैं कि नव अधिनायकवाद कैसे काम करता है। पुतिन जैसे अधिनायकवादी राज्य के माध्यम से शासन करते हैं जनता के माध्यम से नहीं क्योंकि जैसा कि सामाजिक मनोवैज्ञानिक बॉब अल्टेमेयर बताते हैं वे अंततः जनसंख्या के एक छोटे से अल्पसंख्यक का प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर ट्रंप जीतते हैं तो वे लोगों के लिए मतदान करना और भी कठिन बना देंगे। नागरिक अधिकार समूहों को डर है कि वे जनगणना में नागरिकता संबंधी प्रश्न जोड़ सकते हैं न्याय विभाग का उपयोग करके मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर सफाई कर सकते हैं और चुनाव अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू कर सकते हैं। 2) विधायी और न्यायिक शाखाओं को कमज़ोर करना नए अधिनायकवाद की दूसरी कुंजी है: विधायी शाखा द्वारा सरकार को नियंत्रित और संतुलित करने के कार्य को दरकिनार करना। यहां लक्ष्य कार्यकारी आदेश द्वारा शासन करना या विधायी बहुमत के माध्यम से शासन करना है। नव अधिनायकवाद का यह ब्रांड स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता है क्योंकि इसका अभी तक कोई नाम नहीं है। यह कुछ अलग दिखता है। उदाहरण के लिए दक्षिणपंथी लोकलुभावनवाद जो उदारवाद विरोधी है लेकिन अभी तक लोकतंत्र विरोधी नहीं है। और फिर अचानक यह खुद को लोकतंत्र विरोधी अतिवाद के रूप में दिखाता है जैसा कि ट्रंप ने 2020 के चुनाव परिणाम को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कैपिटल हिल्स पर लोगों को धावा बोलने को प्रोत्साहित किया। इस पल ने ट्रंप को एक नव अधिनायकवादी के रूप में स्पष्ट रूप से उजागर कर दिया। इस बारे में अतिरिक्त बहस कि क्या ट्रंप एडोल्फ हिटलर की तरह हैं व्यर्थ होने का जोखिम है। लेकिन समस्या यह है कि फासीवाद अब लोकतंत्र विरोधी चरमपंथ का एकमात्र नाम है। सभी फासीवादी सत्तावादी होते हैं। लेकिन सभी सत्तावादी फासीवादी नहीं होते। यह समझना महत्वपूर्ण है कि सत्तावाद के अन्य प्रकार भी हैं – और वे कैसे भिन्न हैं। यह सिर्फ ट्रंप को अमेरिकी लोकतंत्र को नष्ट करने की कोशिश करने से रोकने के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। यह ट्रंप की नकल करने वालों को रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण है जो अब दूसरे लोकतंत्रों में उभरेंगे। अगर अभी भी उनके लिए ‘‘फासीवादी’ के अलावा कोई नाम नहीं है तो वे भी अस्पष्टता के बीच ही पनपेंगे। नव अधिनायकवाद क्या है : मेरा सुझाव है कि हम इस बात पर ध्यान केंद्रित करें कि ट्रंप वास्तम में क्या हैं एक लोकतंत्र विरोधी ‘नव अधिनायकवादी’’ – और समझें कि इसका क्या अर्थ है और कैसे वह दक्षिणपंथी लोकलुभावनवाद का उपयोग करके व्यापक समर्थन प्राप्त कर रहे हैं। नव अधिनायकवादी के लिए जरूरी नहीं कि वह किसी देश की संस्थाओं पर हमला करे उदाहरण के लिए चुनावों को खत्म कर दे। बल्कि वे लोकतंत्र को अंदर से खोखला कर देते हैं ताकि मुखौटा की तरह एक-दलीय राज्य की स्थापना हो। आज हमारे सामने इस प्रकार के शासकों के कई उदाहरण हैं: तुर्किये के रसप तैयब एर्दोआन हंगरी के विक्टर ओरबान बेलारूस के अलेक्जेंडर लुकाशेंको ट्यूनीशिया के कैस सैयद और बेशक नव अधिनायकवादियों का सबसे चर्चित चेहरा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हैं।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडियाफोटो क्रेडिट : Wikimedia common