केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज अपने जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान कठुआ में सीमा चौकी ‘विनय’ का दौरा किया और वहां तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों से बातचीत की। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह …इस अवसर पर सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो के निदेशक और सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अपने दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा बल के शहीद सहायक कमांडेंट विनय प्रसाद को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने 2019 में कठुआ जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्यूटी के दौरान अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। इससे पहले, 2021 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने जम्मू सीमा पर मकवाल सीमा चौकी का भी दौरा किया था।केंद्रीय गृह मंत्री ने सीमा पर नवनिर्मित सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिसमें 8 महिला बैरक, हाई-मास्ट लाइट, एक जी+1 टावर और एक समग्र बीओपी शामिल हैं, जिनका निर्माण ₹47.22 करोड़ की लागत से किया गया है।
इन पहलों ने सीमा सुरक्षा बल के जवानों की ड्यूटी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है और उनके रहने की स्थिति में भी सुधार किया है।केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री ने जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी में बीएसएफ कर्मियों और अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। जवानों से बातचीत के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यहां आकर एहसास होता है कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान किन कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
उन्होंने कहा कि भीषण ठंड, भारी बारिश या 45 डिग्री सेल्सियस तक तापमान के बावजूद, भौगोलिक या जलवायु चुनौतियों के बावजूद, हमारे जवान पूरी तैयारी और सतर्कता के साथ सीमाओं की सुरक्षा के लिए सजग और समर्पित रहते हैं। अमित शाह ने कहा कि देश की सुरक्षा की बात करें तो बीएसएफ का गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि पूरा देश जानता है कि बीएसएफ हमारी रक्षा की पहली पंक्ति है और बल ने हमेशा इस जिम्मेदारी को बेहतरीन तरीके से निभाया है। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के साथ हर युद्ध में हमारे बीएसएफ जवानों का योगदान भारतीय सेना के योगदान जितना ही महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनाती के लिए इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली के दो मॉडल विकसित किए गए हैं।
पूरी सीमा पर इनके लगने के बाद, जवानों को तकनीक का उपयोग करके सूचना प्राप्त करने और दुश्मन की किसी भी हरकत का तुरंत जवाब देने में काफी आसानी होगी। श्री शाह ने यह भी बताया कि तकनीक का उपयोग करके घुसपैठ की पहचान करने और सुरंगों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए कई प्रयोग किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि कुछ वर्षों में संपूर्ण भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों को तकनीकी सहायता से पूरी तरह सुसज्जित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों का बलिदान, वीरता, पराक्रम और साहस सीमा पार के दुश्मनों के खिलाफ भारत की ढाल है और यही कारण है कि देश के लोग बीएसएफ के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं।
अमित शाह ने कहा कि वर्तमान में तकनीक से संबंधित 26 से अधिक पहलों का परीक्षण किया जा रहा है, जिनमें एंटी-ड्रोन तकनीक, सुरंग पहचान तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी शामिल हैं। श्री शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि अगले मार्च तक इन परीक्षणों के कुछ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं, जिससे जवानों को अपने कर्तव्यों का पालन करने में आसानी होगी।केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार जवानों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में आने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए काम कर रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सुरक्षा बलों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत सरकार ने सुरक्षा बलों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें आयुष्मान CAPF, अनुग्रह राशि भुगतान, CAPF वेतन पैकेज योजना के तहत आकस्मिक मृत्यु बीमा कवरेज, एकीकृत पेंशन योजना, प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना (PMSS) और ई-हाउसिंग शामिल हैं।
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