गैस संकट : ‘तवा रोटी के बजाय तंदूरी रोटी’, मप्र के होटलों में व्यंजन सूची बदलने के लिए परामर्श जारी

इंदौर, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते रसोई गैस की आपूर्ति में रुकावट से निपटने के लिए मध्यप्रदेश में होटल-रेस्तरांओं के एक संगठन ने ग्राहकों को परोसे जाने वाले व्यंजनों की सूची में बदलाव का परामर्श जारी किया है। संगठन के एक शीर्ष पदाधिकारी ने यह जानकारी दी। पदाधिकारी के मुताबिक संगठन ने अपने परामर्श में कहा है कि मौजूदा हालात में होटल-रेस्तरांओं की व्यंजन सूची में उन व्यंजनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिनमें रसोई गैस की खपत कम होती है या जो जल्दी पक जाते हैं।

मध्यप्रदेश होटल एसोसिएशन ने परामर्श में कहा है कि हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण वाणिज्यिक उपयोग वाली रसोई गैस की आपूर्ति में रुकावट आई है और होटल-रेस्तरांओं में ईंधन बचाकर कारोबार जारी रखने के लिए उपाय किए जाने की जरूरत है। परामर्श में कहा गया है ‘’रेस्तरां और रूम-सर्विस के मेनू को तर्कसंगत बनाएं। उन व्यंजनों को प्राथमिकता दें जिनमें रसोई गैस का उपयोग कम होता है या जिन्हें पकाने में कम समय लगता है।’’

परामर्श में होटल-रेस्तरांओं की व्यंजन सूची से उन व्यंजनों को अस्थायी रूप से हटाने या कम करने के लिए कहा गया है जिन्हें धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाने और देर तक तलने की आवश्यकता होती है। परामर्श में रेस्तरांओं में जल्दी पकने वाले व्यंजनों का ‘संकटकालीन मेनू’ पेश करने की भी बात कही गई है और बिजली से चलने वाले उपकरणों के इस्तेमाल पर बल दिया गया है।

मध्यप्रदेश होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया ‘‘वाणिज्यिक उपयोग वाली रसोई गैस की आपूर्ति में व्यवधान से हमारा कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसके मद्देनजर हमने राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव से निवेदन किया है कि होटलों को आपातकालीन सेवाओं की श्रेणी में रखकर उन्हें राशनिंग के आधार पर रसोई गैस मुहैया कराई जाए।’’ उन्होंने बताया कि होटल-रेस्तरांओं में भोजन पकाने के ईंधन के वैकल्पिक इंतजामों के तहत बिजली चालित उपकरणों के साथ ही कोयले लकड़ी और डीजल से चलने वाली भट्ठियां जुटाई जा रही हैं।

सूरी ने बताया हमने अपने सदस्यों को परामर्श दिया है कि ईंधन बचाने के लिए रसोई गैस से तवा रोटी बनाने के बजाय कोयले या लकड़ी से चलने वाले परंपरागत तंदूरों पर रोटी बनाई जा सकती है। इसी तरह माइक्रोवेव ओवन में पकने वाले पिज्जा सरीखे व्यंजनों को व्यंजन सूच में तरजीह दी सकती है।’’ उन्होंने कहा कि इन दिनों राज्य के बड़े शहरों के होटलों में हर रोज कम से कम 500 शादियां हो रही हैं जिनमें हजारों लोग भोजन कर रहे हैं लिहाजा ईंधन बचाने के लिए व्यंजन सूची में बदलाव जरूरी है।

सूरी ने बताया कि राज्य में होटल-रेस्तरांओं की कुल तादाद 50 000 से ज्यादा है जिनमें से करीब 10 000 प्रतिष्ठान उनके संगठन से जुड़े हैं। क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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