पणजी, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कैंसर के उपचार में पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा को एकीकृत करने तथा देखभाल सेवाओं को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित किया। पिछले सप्ताहांत आयोजित ‘इंडियन एसोसिएशन ऑफ सर्जिकल ऑन्कोलॉजी’(आईएएसओ नैटकॉन 2025) के 38वें राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए सावंत ने कहा कि राज्य ने आयुर्वेद योग और आधुनिक चिकित्सा के साथ एकीकृत ऑन्कोलॉजी में अग्रणी कदम उठाए हैं।
पणजी के निकट गोकर्मा ऑन्कोलॉजी एसोसिएशन द्वारा आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन का विषय था ‘ऑन्कोवॉयज: समुद्र से शिखर तक कैंसर सर्जरी की दिशा में आगे बढ़ना’। इस सम्मेलन में देश और विदेश के प्रमुख कैंसर रोग विशेषज्ञ सर्जन अनुसंधानकर्ता और स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर एकत्रित हुए।
सावंत ने कहा कि टाटा मेमोरियल सेंटर के एसीटीआरईसी (कैंसर उपचार अनुसंधान और शिक्षा के लिए उन्नत केंद्र) के सहयोग से धारगल (उत्तरी गोवा) में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में स्थापित पहले संयुक्त एकीकृत ऑन्कोलॉजी क्लिनिक ने समग्र रोगी-केंद्रित देखभाल में एक नया मानक स्थापित किया है।
कैंसर के इलाज में देखभाल सुविधाओं के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा जीवन को बढ़ाने में सफल रही है लेकिन रोगियों के लिए जीवन की गरिमा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी समान ध्यान दिया जाना चाहिए।
सावंत प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक हैं। मुख्यमंत्री ने देखभाल सेवाओं में लगे स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों और कोंकण क्षेत्र में कैंसर देखभाल के विकेंद्रीकरण के प्रयासों के लिए गोकर्मा ऑन्कोलॉजी एसोसिएशन की सराहना की।
उद्घाटन समारोह में उपस्थित राज्यसभा सदस्य और भाजपा की गोवा इकाई के अध्यक्ष सदानंद शेट तानावडे ने कैंसर विशेषज्ञों की सेवा के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की और इसे ‘‘राष्ट्र निर्माण का एक सच्चा कार्य’’ बताया।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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