नयी दिल्ली, संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के नेता अब्दुल रहमान मक्की को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव पर से चीन ने रोक हटाने का फैसला इसलिए किया क्योंकि वह वैश्विक स्तर पर अलग-थलग नहीं पड़ना चाहता।
चीन के इस कदम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 1267 आईएसआईएल (दाएश) और अलकायदा प्रतिबंध समिति द्वारा मक्की को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने का रास्ता साफ हो गया।
अकबरुद्दीन ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘चीन जैसा देश आतंकवाद के रक्षक के रूप में क्यों दिखना चाहेगा? निश्चित रूप से वह ऐसा पाकिस्तान के इशारे पर कर रहा है। लेकिन कुछ सीमाएं हैं और वहीं तक चीन पाकिस्तान की ओर से अपने हितों के साथ समझौता करेगा।’’
पूर्व राजनयिक ने कहा कि चीन अब आतंकवाद से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए तैयार है, लेकिन भारत को उम्मीद है कि वह सीमा मुद्दे पर प्राथमिक चिंताओं को भी दूर करेगा।
अकबरुद्दीन ने कहा, ‘‘हम न केवल आतंकवाद पर बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चीन का समर्थन चाहते हैं। उसे सीमा पर हमारी प्राथमिक चिंताओं को भी दूर करने की जरूरत है। कुछ अड़ंगों के बाद, आतंकवाद से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने के लिए वह तैयार है।’’
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दों पर चीन से समर्थन प्राप्त करने से द्विपक्षीय संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ सकता है, जिसे 2020 में गलवान गतिरोध के बाद कई सैन्य टकरावों से नुकसान पहुंचा है।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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