भदेरवाह (जम्मू-कश्मीर), जम्मू कश्मीर के डोडा जिले में जनजातीय लेखकों का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जहां कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों ने प्रामाणिक जनजातीय साहित्य की रक्षा के लिए एक मंच की स्थापना की और युवाओं को लेखन के माध्यम से अपनी अनूठी संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के आयोजकों ने रविवार को यह जानकारी दी।
दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन डोडा जिले में जम्मू विश्वविद्यालय के भद्रवाह परिसर में किया गया, जिसमें देशभर के 37 जनजातीय लेखकों, कवियों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों ने भाग लिया। डोडा के उपायुक्त विशेष पॉल महाजन ने शनिवार को ‘झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखाड़ा’ और ‘अंजुमन-ए-तरक्की गोजरी अदब’ के सहयोग से इस सम्मेलन का उद्घाटन किया।
बैठक में संथाली, गुज्जर, बकरवाल और मुंडा सहित विभिन्न जनजातियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। ये प्रतिभागी ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, राजस्थान, दिल्ली, बिहार, झारखंड, असम, जम्मू और कश्मीर और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए थे।
बैठक का समन्वय करने वाली वंदना टेटे ने कहा, “इसका उद्देश्य सभी जनजातियों को एक मंच पर एकजुट करना था, संस्कृति के आदान-प्रदान की सुविधा उपलब्ध कराना और उनकी विशिष्ट पहचान को संरक्षित करने में आने वाली चुनौतियों का समाधान करना था।”
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common