जलवायु संकट दुनिया भर में भीषण आग को बढ़ावा दे रहा

मेलबर्न, पृथ्वी के फेफड़े कहलाने वाले अमेज़न के घने जंगलों से उठते धुएं की भयावह तस्वीरें हम सभी ने देखी हैं। स्पेन के अग्निशामक खेत में लगी आग से जूझ रहे हैं। लॉस एंजिलिस में मशहूर हस्तियों के घर धुएं से काले पड़ गए हैं और ऑस्ट्रेलिया के कुछ शहर धुएं से भरे हैं।

अगर आपको लगता है कि पिछले साल जंगल की आग और उनके प्रभाव अधिक भीषण थे – तो आप सही हैं। हमारी नई रिपोर्ट जो विभिन्न महाद्वीपों के वैज्ञानिकों के बीच एक सहयोग से तैयार हुई है दिखाती है कि जलवायु परिवर्तन ने अप्रत्याशित और विनाशकारी तरीकों से दुनिया में दावानल (जंगल की आग) के स्तर को और बढ़ा दिया है। मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ने दुनिया के कुछ क्षेत्रों में जंगल की आग जिसे ऑस्ट्रेलिया में बुशफ़ायर कहा जाता है से जलने वाले क्षेत्र में 30 अप्रत्याशित वृद्धि की है।

स्पष्ट पैटर्न : हमारे अध्ययन में पिछले वर्ष लगी जंगल की आग के कारणों का पता लगाने और उनकी जांच करने के लिए उपग्रह प्रेक्षणों और उन्नत मॉडलिंग का उपयोग किया गया। शोध दल ने जलवायु और भूमि उपयोग परिवर्तन की भूमिका पर विचार किया और जलवायु तथा चरम घटनाओं के बीच एक स्पष्ट अंतर्संबंध पाया।

क्षेत्रीय विशेषज्ञों ने उन घटनाओं और प्रभावों को दर्ज करने के लिए स्थानीय जानकारी प्रदान की जिन्हें उपग्रहों ने नहीं पकड़ा था। ओशिनिया के लिए यह भूमिका कंट्री फायर अथॉरिटी की डॉ. सारा हैरिस और मैंने निभाई। पिछले वर्ष भारत से भी बड़ा भू-भाग – लगभग 37 लाख वर्ग किलोमीटर – दुनिया भर में जल गया। इस आग से 10 करोड़ से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए और 215 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत के घर और बुनियादी ढांचा खतरे में पड़ गया।

गर्म होती जलवायु का मतलब न केवल अधिक खतरनाक आग लगने की संभावना वाली परिस्थितियां हैं बल्कि यह वनस्पति के बढ़ने और सूखने के तरीके को भी प्रभावित करती है जिससे आग फैलने के लिए ईंधन बनता है।ऑस्ट्रेलिया में बुशफ़ायर हालांकि पिछले मौसमों जैसे कि 2019-20 की ब्लैक समर बुशफ़ायर के समग्र विस्तार या प्रभाव तक नहीं पहुंच पाए। फिर भी पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में आग की 1 000 से ज़्यादा घटनाओं ने लगभग 4 70 000 हेक्टेयर और मध्य ऑस्ट्रेलिया में 50 लाख हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन को जला दिया। विक्टोरिया में ग्रैम्पियंस नेशनल पार्क का दो-तिहाई इलाका जल गया।

हमारे विश्लेषण से पता चला है कि अमेरिका में जनवरी में लॉस एंजिलिस में लगी जंगल की आग की भयावहता दोगुनी थी और इसने ग्लोबल वार्मिंग के बिना जलने वाले क्षेत्र की तुलना में 25 गुना बड़ा क्षेत्र जला दिया।

पिछले 30 महीनों में लॉस एंजिलिस में असामान्य रूप से नम मौसम ने वनस्पतियों की तेज़ वृद्धि में योगदान दिया और असामान्य रूप से गर्म और शुष्क जनवरी के दौरान जंगल की आग की नींव रखी।

दक्षिण अमेरिका में ब्राज़ील बोलीविया और पराग्वे की सीमा पर स्थित पैंटानल-चिकिटानो क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण लगी आग 35 गुना बड़ी थी। रिकॉर्ड तोड़ आग ने अमेज़न और कांगो के कुछ हिस्सों को तबाह कर दिया जिससे अरबों टन कार्बन डाइऑक्साइड निकली।

अभी देर नहीं हुई है : यह स्पष्ट है कि यदि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि जारी रही तो अधिक भीषण गर्मी और सूखे के कारण दुनिया भर में प्रचंड गर्मी की घटनाएं और भी तीव्र हो जाएंगी।

लेकिन अभी भी कार्रवाई करने में देर नहीं हुई है। हमें जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन में कटौती प्रकृति की रक्षा और भूमि की कटाई को कम करने के लिए मज़बूत और तेज़ जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता है। हम सूक्ष्म वन

प्रबंधन से लेकर घरों की तैयारी और अल्पकालिक व दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन तक आग के जोखिम से निपटने में बेहतर हो सकते हैं। आग लगने की घटनाओं में क्षेत्रीय अंतर होते हैं इसलिए प्रतिक्रिया भी स्थानीय होनी चाहिए। हमें आग से निपटने में स्थानीय और क्षेत्रीय ज्ञान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

सीओपी30 में कार्रवाई : वर्ष 2024-25 में आग से आठ अरब टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित हुई जो 2003 के बाद के औसत से लगभग 10 फीसदी अधिक है। दक्षिण अमेरिकी शुष्क वनों और आर्द्रभूमि में उत्सर्जन वैश्विक औसत से तीन गुना से भी अधिक था और कनाडा के बोरियल वनों में औसत से दोगुना था। यह ग्रीनहाउस प्रदूषण की एक बेहद चिंताजनक मात्रा है। अकेले अतिरिक्त उत्सर्जन 2024 में 200 से ज़्यादा देशों के राष्ट्रीय जीवाश्म ईंधन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से भी ज़्यादा हो गया।

अगले महीने विश्व के नेता वैज्ञानिक गैर-सरकारी संगठन और नागरिक समाज संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक जलवायु शिखर सम्मेलन (सीओपी30) के लिए ब्राज़ील के बेलेम जाएंगे जहां जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों पर चर्चा होगी।विकसित देश जंगल की भीषण आग के सबसे बुरे प्रभावों से बचने के लिए जो सबसे बड़ा योगदान दे सकते हैं वह है इस दशक में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेज़ी से कटौती करने का संकल्प लेना।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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