जीएसटी पंजीकरण, कर मांग और निर्यात भुगतान पर सीबीआईसी ने जारी किए आठ परिपत्र

नयी दिल्ली, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा-शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने जीएसटी पंजीकरण, कर मांग और निर्यात भुगतान सहित विभिन्न मुद्दों पर आठ परिपत्र जारी किए हैं। इनका उद्देश्य कर अनुपालन की प्रक्रिया को आसान बनाना, कर अधिकारियों के कामकाज में एकरूपता लाना और करदाताओं को प्रक्रियागत स्पष्टता देना है।

ये परिपत्र इस महीने की शुरुआत में हुई जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए फैसलों के अनुरूप जारी किए गए हैं। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित मामलों में निर्णय लेने वाला अंतिम निकाय जीएसटी परिषद है।

सीबीआईसी ने 26 अक्टूबर को जारी दिशानिर्देशों में जीएसटी पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेजों की सूची और सहमति पत्र, हलफनामे तथा शपथ पत्र के प्रारूप दिए हैं। इससे पंजीकरण आवेदनों पर कार्रवाई के दौरान कर अधिकारियों द्वारा स्पष्टीकरण या अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की जरूरत कम होने की उम्मीद है।

बोर्ड ने केंद्रीय जीएसटी कानून के तहत कर मांग, न्यायनिर्णयन और अपील की कार्यवाही पर भी दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक, जहां संभव हो, करदाताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने से पहले अपना पक्ष स्पष्ट करने का अवसर दिया जाए। नोटिस में आरोपों और कार्रवाई के आधार का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।

इसके साथ ही, सीबीआईसी ने स्पष्ट किया कि कर मांग उठाते समय अधिकारियों को करदाता की तरफ से कर चोरी की मंशा को साबित करना होगा। ऐसा होने पर ही धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत बयान देने या तथ्यों को छिपाने से संबंधित कड़े प्रावधान लागू किए जा सकेंगे।

बोर्ड ने कर निर्धारण संबंधी न्यायनिर्णयन प्रक्रिया में कृत्रिम मेधा (एआई) और अन्य प्रौद्योगिकी साधनों के इस्तेमाल पर मानवीय निगरानी अनिवार्य की है। एआई से मिली जानकारी पर भरोसा करने या उसे आदेश में शामिल करने से पहले उसकी सटीकता का स्वतंत्र सत्यापन करना होगा।

निर्यातकों के लिए जारी एक अन्य परिपत्र में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत अनुमति-प्राप्त समायोजन व्यवस्था को मान्यता दी गई है। भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार, यदि निर्यात से मिलने वाली राशि का आयात भुगतान के साथ समायोजन किया जाता है, तो एकीकृत जीएसटी कानून के तहत सेवाओं के निर्यात के लिए निर्धारित भुगतान प्राप्ति की शर्त पूरी मानी जाएगी।

इन परिपत्रों पर अपनी प्रतिक्रिया में सलाहकार फर्म ईवाई इंडिया के कर साझेदार सौरभ अग्रवाल ने कहा कि इससे सीमापार कारोबार में स्पष्टता आएगी और जीएसटी व्यवस्था विदेशी मुद्रा के अनुमत निपटान तरीकों के अनुरूप होगी।

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में कानून और प्रक्रियाओं को अपराध के दायरे से बाहर लाने जैसे कई बदलावों को मंजूरी दी गई थी। इनमें कर अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियां समाप्त करना और अभियोजन के लिए कर राशि की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करना शामिल है।

हालांकि, इन कानूनी संशोधनों के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी और ये अगले साल एक अप्रैल से प्रभावी होंगे। जहां तक प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े बदलावों का सवाल है तो उन्हें परिपत्रों के जरिये लागू किया जा रहा है।

एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध साझेदार रजत मोहन ने कहा कि ये परिपत्र नियम-आधारित कर प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हैं। इससे कारोबारियों को नकदी प्रवाह का बेहतर अनुमान लगाने और कर विवादों का जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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